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इंदौर में 30 कछुओं के साथ पकड़े गए दो आरोपी, पूछताछ में वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क के संकेत

 

मध्य प्रदेश के इंदौर में वन्यजीव तस्करी से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। वन विभाग ने 30 कछुओं के साथ दो आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों से पूछताछ के दौरान अधिकारियों को वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इसके बाद विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

30 कछुओं के साथ पकड़े गए आरोपी

वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को पकड़ा और उनके कब्जे से 30 कछुए बरामद किए। इतनी बड़ी संख्या में कछुओं के मिलने के बाद अधिकारियों को संदेह हुआ कि मामला केवल स्थानीय स्तर पर वन्यजीवों की अवैध खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं है।

आरोपियों से पूछताछ में कछुओं को कहां से लाया गया, उन्हें कहां पहुंचाया जाना था और इस काम में कौन-कौन लोग जुड़े हैं, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

पूछताछ में नेटवर्क के संकेत

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान वन्यजीव तस्करी के बड़े नेटवर्क से जुड़े कुछ अहम सुराग मिले हैं। इसके बाद विभाग अब उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है, जो कछुओं की पकड़, खरीद, परिवहन और बिक्री में शामिल हो सकते हैं।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद कछुए मध्य प्रदेश के किस क्षेत्र से लाए गए थे और इन्हें किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।

अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश

वन विभाग अब गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटा है। अधिकारियों को आशंका है कि वन्यजीवों की तस्करी के पीछे कई लोगों का संगठित नेटवर्क काम कर सकता है।

पूछताछ में सामने आने वाली जानकारी के आधार पर संभावित ठिकानों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। विभाग यह भी जांच कर रहा है कि आरोपियों ने इससे पहले कितनी बार वन्यजीवों की तस्करी की है।

कछुओं की तस्करी पर वन विभाग की नजर

कछुए वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित प्रजातियों में शामिल हो सकते हैं और उनके अवैध पकड़ने, रखने या व्यापार पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। वन्यजीवों की तस्करी से जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है।

वन विभाग की टीम बरामद कछुओं की प्रजाति की पहचान भी कर रही है। प्रजाति की पुष्टि होने के बाद उनके संरक्षण और आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

जांच का दायरा बढ़ाया

30 कछुओं की बरामदगी के बाद अब वन विभाग मामले को गंभीरता से ले रहा है। अधिकारियों का ध्यान केवल पकड़े गए दोनों आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके पीछे सक्रिय संभावित नेटवर्क तक पहुंचने पर है।

फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। वन विभाग को उम्मीद है कि पूछताछ और तकनीकी जांच के जरिए वन्यजीव तस्करी से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सकेगा। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।