ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को राहत, CBI ने बड़ा आरोप हटा लिया
भोपाल की मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी उनकी सास और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिली है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई ने गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न से जुड़ा आरोप अपनी चार्जशीट में शामिल नहीं किया है। इस बदलाव के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह के वकील को संशोधित जमानत याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 को भोपाल में मौत हुई थी। उनकी मौत के बाद उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। शुरुआती कार्रवाई में दोनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने के साथ दहेज से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। बाद में राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने जांच के बाद 14 अगस्त को विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
सीबीआई की चार्जशीट में गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 85, 108 और 3(5) के तहत आरोप लगाए गए हैं। इनमें पति या परिवार के सदस्यों द्वारा क्रूरता, आत्महत्या के लिए उकसाने और साझा मंशा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, दहेज के लिए उत्पीड़न से जुड़े आरोप को चार्जशीट में आगे नहीं बढ़ाया गया है।
गिरिबाला सिंह की ओर से उनके वकील सुरेंद्र सिंह ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को इस बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने जमानत की मांग करते हुए कहा कि दहेज से जुड़े आरोप हटने के बाद मामले की कानूनी स्थिति बदल गई है। इसके बाद हाई कोर्ट ने वकील को पुरानी जमानत याचिका में जरूरी संशोधन कर नई याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने तत्काल जमानत मंजूर नहीं की है और अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को निर्धारित की है।
वहीं, ट्विशा शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा है कि सीबीआई की चार्जशीट में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे पर ट्विशा को कथित तौर पर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप हैं। उनके अनुसार, दहेज की मांग और दहेज के कारण मौत से जुड़े पहलुओं की जांच को लेकर भी कुछ बिंदु अभी विचाराधीन हैं। डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच का भी उल्लेख किया गया है।
इस मामले में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। दहेज से जुड़े आरोप को चार्जशीट में शामिल नहीं किए जाने से गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका के लिए कानूनी स्थिति बदली है, लेकिन यह बदलाव अपने आप में जमानत मिलने का आदेश नहीं है। अब हाई कोर्ट संशोधित जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा और उसके बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।