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ट्विशा डेथ केस: सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में ट्रायल पर लगाई रोक, सास गिरिबाला की जमानत पर 26 अक्टूबर को सुनवाई

 

मध्य प्रदेश के चर्चित ट्विशा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में चल रही निचली अदालत की सुनवाई पर रोक लगा दी है। वहीं, मामले में आरोपी सास गिरिबाला की जमानत याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अब 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी। इस घटनाक्रम के बाद मामले की कानूनी कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ट्रायल रुका

ट्विशा डेथ केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल में चल रहे ट्रायल की कार्यवाही फिलहाल रोक दी गई है। इस फैसले का असर मामले की आगे की सुनवाई पर पड़ेगा। हालांकि, रोक किन शर्तों के तहत लगाई गई है और यह कितने समय तक प्रभावी रहेगी, इसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होगी।निचली अदालत में ट्रायल रुकने के बाद अब मामले से जुड़ी आगे की कानूनी प्रक्रिया और शीर्ष अदालत के निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

ट्विशा के पिता ने केस दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की

ट्विशा शर्मा के पिता नवनीधि शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले को भोपाल की अदालत से दिल्ली की सक्षम अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की है। याचिका में निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई, गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। 

26 अक्टूबर को होगी जमानत याचिका पर सुनवाई

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश उपलब्ध नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ा दी। अब इस मामले में 26 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे सुनवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को जमानत याचिका पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

क्या है ट्विशा शर्मा डेथ केस?

पूर्व मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में मौत हो गई थी। इस मामले में उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह के खिलाफ जांच चल रही है। गिरिबाला सिंह पूर्व जिला न्यायाधीश रह चुकी हैं। मामले की जांच सीबीआई कर रही है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रायल पर रोक लगाए जाने का मतलब यह नहीं है कि गिरिबाला सिंह को जमानत मिल गई है। केस ट्रांसफर की याचिका और जमानत याचिका अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। अब 26 अक्टूबर को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट में केस स्थानांतरण पर आगे की कार्रवाई अहम होगी।