×

सच्ची बात, बेधड़क: दैनिक भास्कर भोपाल के 68 साल, 11 दिनों में शहर की 11 अनदेखी कहानियां

 

भोपाल संस्करण ने अपने 68 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर हम लेकर आए हैं भोपाल की ऐसी कहानियां, जिनसे शहर की पहचान जुड़ी है, लेकिन जिनके कई पहलू अब भी अनदेखे हैं।

अगले 11 दिनों तक, हर सुबह आपको भोपाल की एक नई कहानी से रूबरू कराया जाएगा। ये कहानियां सिर्फ शहर की पुरानी यादों तक सीमित नहीं होंगी, बल्कि इनमें भोपाल के बदलते दौर, यहां के लोगों, ऐतिहासिक घटनाओं, अनसुने किस्सों और उन जगहों की कहानी भी शामिल होगी, जिन्होंने शहर की पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई।

भोपाल को सिर्फ इमारतों, सड़कों और बाजारों से नहीं समझा जा सकता। इस शहर की असली पहचान इसके लोगों, उनकी यादों, संघर्षों और उन घटनाओं में छिपी है, जिन्होंने समय के साथ भोपाल को एक अलग पहचान दी।

11 दिन, 11 कहानियां और भोपाल के कई अनदेखे पहलू।
इस विशेष श्रृंखला के जरिए हम आपको शहर के उसी चेहरे से मिलाएंगे, जो रोजमर्रा की भागदौड़ में अक्सर नजरों से छूट जाता है।

दैनिक भास्कर के साथ जुड़िए और जानिए भोपाल की वे कहानियां, जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुनी होंगी।