केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के विरोध में आदिवासी परिवारों का जल सत्याग्रह, मुआवजा और पुनर्वास पैकेज बढ़ाने की मांग
मध्यप्रदेश के केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से प्रभावित आदिवासी परिवारों ने अपनी मांगों को लेकर गुरुवार को एक बार फिर मिट्टी-जल सत्याग्रह किया। प्रभावित ग्रामीण बराना नदी में उतरकर विरोध प्रदर्शन करते नजर आए। उनका कहना है कि परियोजना के कारण उन्हें विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाला मुआवजा और पुनर्वास पैकेज उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं है।
आंदोलन कर रहे परिवारों की प्रमुख मांग है कि उन्हें बेहतर मुआवजा दिया जाए और पुनर्वास पैकेज में वृद्धि की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन, घर और आजीविका से जुड़े नुकसान की भरपाई के लिए मौजूदा प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक तरीके से बसाने की व्यवस्था की जाए।
जानकारी के अनुसार, केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत कई गांव और क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। परियोजना से जुड़े विस्थापन को लेकर लंबे समय से ग्रामीण अपनी मांगें उठा रहे हैं। प्रभावित आदिवासी परिवारों का कहना है कि वे विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर उन्हें अपने अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
मिट्टी-जल सत्याग्रह के दौरान ग्रामीणों ने नदी में खड़े होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुनर्वास और मुआवजे को लेकर प्रशासन से कई बार बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रभावित परिवारों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।
वहीं, प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों की मांगों पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित लोगों के हितों का ध्यान रखा जा रहा है और शासन के निर्देशों के अनुसार पुनर्वास प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से जल संकट वाले क्षेत्रों में पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा लगातार सामने आता रहा है।
फिलहाल प्रभावित आदिवासी परिवारों का सत्याग्रह जारी है और उनकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।