तिवारी का सुझाव: इमारत परिसर में वैज्ञानिक खुदाई से मूर्तियों को बाहर निकालकर विधिपूर्वक स्थापना करें
हाल ही में चर्चा में आए एक धार्मिक एवं पुरातात्विक मामले में तिवारी ने अहम बयान देते हुए कहा है कि सच का पता लगाने और इतिहास को संरक्षित करने के लिए इमारत परिसर में वैज्ञानिक तरीके से खुदाई की जानी चाहिए। उनका यह भी सुझाव है कि खुदाई के दौरान प्राप्त होने वाली मूर्तियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला जाए और फिर उन्हें परिसर में धार्मिक विधि-विधान के अनुसार स्थापित किया जाए।
तिवारी ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल ऐतिहासिक सच्चाई उजागर होगी, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी इसका महत्व बढ़ जाएगा। उन्होंने कहा कि मूर्तियों को वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत ही संभालना चाहिए ताकि उनका नुकसान न हो और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इन्हें संरक्षित रखा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थल और पुरातात्विक महत्व वाले स्थानों पर इस तरह की खुदाई एक संवेदनशील प्रक्रिया होती है। इसके लिए पुरातत्व विभाग और विशेषज्ञों की टीम को शामिल करना आवश्यक है, ताकि हर कदम कानूनी और वैज्ञानिक मानकों के अनुसार उठाया जा सके।
तिवारी ने यह भी सुझाव दिया कि मूर्तियों की स्थापना के समय पारंपरिक धार्मिक विधियों का पालन किया जाए, ताकि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान बना रहे। उनका कहना है कि यह कदम समुदाय में विश्वास और ऐतिहासिक जागरूकता दोनों को बढ़ाने में मदद करेगा।
स्थानीय प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने इस मामले पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अधिकारी इस सुझाव और अन्य प्रस्तावित तरीकों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि सुरक्षा, धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण का संतुलन बनाए रखा जा सके।
कुल मिलाकर, तिवारी का यह सुझाव इमारत परिसर में मौजूद मूर्तियों की सुरक्षा, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक सच्चाई को संतुलित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप