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बड़े तालाब के किनारे 11.30 करोड़ के तीन फाउंटेन बंद, टेस्टिंग और लोकार्पण के बाद नहीं चले

 

शहर की खूबसूरती बढ़ाने और बड़े तालाब के किनारे पर्यटन आकर्षण बढ़ाने के उद्देश्य से बनाए गए तीन बड़े फाउंटेन अब बंद पड़े हैं। इन फाउंटेन के निर्माण पर करीब 11.30 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। उम्मीद थी कि इनके शुरू होने से तालाब किनारे का नजारा और आकर्षक होगा और शहरवासियों के साथ पर्यटकों को भी नया आकर्षण मिलेगा। लेकिन हकीकत यह है कि तीनों फाउंटेन टेस्टिंग और लोकार्पण के बाद ही बंद हो गए।

इन फाउंटेन को तैयार करने के पीछे शहर के सौंदर्यीकरण की योजना थी। बड़े तालाब के किनारे बनाए गए इन आकर्षक फाउंटेन से पानी के प्रदर्शन और रोशनी के जरिए आसपास के क्षेत्र को सुंदर बनाने की योजना थी। परियोजना पर करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

कहीं तकनीकी खराबी तो कहीं देखरेख का अभाव

तीनों फाउंटेन के बंद होने की अलग-अलग वजहें सामने आई हैं। कहीं तकनीकी खराबी के कारण संचालन रुक गया, तो कहीं नियमित देखरेख नहीं होने से व्यवस्था ठप हो गई। इससे सवाल उठ रहे हैं कि करोड़ों रुपए खर्च करके तैयार की गई परियोजनाओं के रखरखाव की जिम्मेदारी किस तरह निभाई गई।

आमतौर पर ऐसे फाउंटेन को लगातार चलाने के लिए नियमित तकनीकी जांच, मोटर और पंप की देखरेख, बिजली व्यवस्था तथा पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी होता है। लेकिन इन व्यवस्थाओं में कमी आने पर फाउंटेन बंद हो सकते हैं।

लोकार्पण के बाद भी नहीं मिला लोगों को लाभ

किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण और लोकार्पण से तय नहीं होती, बल्कि उसका नियमित संचालन भी जरूरी होता है। बड़े तालाब के किनारे बने इन फाउंटेन के मामले में भी यही स्थिति सामने आई है। टेस्टिंग और लोकार्पण के बाद ही इनके बंद हो जाने से परियोजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया।

शहर के सौंदर्यीकरण के लिए 11.30 करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन फाउंटेन बंद होने से यह निवेश फिलहाल उपयोगी साबित नहीं हो रहा है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी इनसे मिलने वाला आकर्षण नहीं मिल पा रहा।

रखरखाव और जवाबदेही पर उठे सवाल

तीनों फाउंटेन के बंद होने से परियोजना के रखरखाव और जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग तकनीकी खराबियों की जांच कराए और यह पता लगाए कि फाउंटेन बंद होने के पीछे क्या कारण रहे। साथ ही, इनके नियमित संचालन और रखरखाव की स्थायी व्यवस्था भी बनाई जाए।

करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार की गई ऐसी परियोजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब निर्माण के साथ उनके संचालन और देखरेख पर भी ध्यान दिया जाए। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन फाउंटेन को दोबारा शुरू करने के लिए क्या कदम उठाता है।