रतलाम गोलीकांड मामले में 12 साल बाद आया फैसला, कांग्रेस पार्षद यास्मीन शेरानी पर हमले के तीन आरोपी दोषी करार
मध्य प्रदेश के रतलाम में वर्ष 2014 में कांग्रेस नेत्री, नगर निगम की तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष और वर्तमान पार्षद यास्मीन शेरानी पर हुए जानलेवा हमले के मामले में आखिरकार 12 साल बाद अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। सप्तम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। सजा का ऐलान अदालत द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
यह मामला वर्ष 2014 का है, जब यास्मीन शेरानी पर अज्ञात बदमाशों ने जानलेवा हमला कर फायरिंग की थी। इस घटना ने उस समय पूरे रतलाम में सनसनी फैला दी थी। हमले में यास्मीन शेरानी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। इसके बाद लंबे समय तक अदालत में गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर सुनवाई चलती रही।
करीब 12 वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद सप्तम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को पर्याप्त मानते हुए आरोपियों की संलिप्तता स्वीकार की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने आरोपियों के खिलाफ आरोपों को सिद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं बचाव पक्ष ने भी अपनी ओर से दलीलें पेश कीं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध माना।
इस फैसले के साथ लंबे समय से लंबित एक चर्चित मामले का न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है। अब सभी की नजर अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा पर टिकी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला ऐसे गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया की अहमियत को दर्शाता है।
मामले के फैसले के बाद रतलाम में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इसकी चर्चा तेज हो गई है। वहीं पुलिस और प्रशासन ने कहा है कि कानून अपना काम करता है और गंभीर अपराधों में दोषियों को न्यायालय के माध्यम से सजा दिलाना उनकी प्राथमिकता है।