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रतलाम में जहरीली शराब मामले में तीन आरोपी बरी: कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल, कहा- आरोप साबित नहीं हुए

 

पांच साल पुराने जहरीली और अवैध शराब मामले में रतलाम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हु तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने पुलिस कार्रवाई और विवेचना में कई खामियां पाए जाने पर सख्त टिप्पणी की।कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे  साबित करने में असफल रहा, इसलिए आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

पुलिस जांच में मिली कई खामियां

मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि विवेचना के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान नहीं दिया गया और साक्ष्यों को मजबूत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया।अदालत ने माना कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अपराध साबित करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी होते हैं।

अभियोजन पक्ष नहीं कर सका आरोप साबित

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर पाया। मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों में भी ऐसी कमियां थीं, जिनका लाभ आरोपियों को मिला।इसी आधार पर न्यायालय ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

जहरीली शराब मामले से जुड़ा था प्रकरण

यह मामला अवैध और जहरीली शराब से जुड़ा हुआ था, जिसमें पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। मामले में लंबे समय तक न्यायालय में सुनवाई चली।पांच साल बाद आए फैसले में अदालत ने पुलिस जांच की कमियों को प्रमुख आधार बनाया।

कोर्ट की टिप्पणी के बाद उठे सवाल

अदालत की टिप्पणी के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया और ऐसे मामलों में साक्ष्य जुटाने के तरीके को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध शराब जैसे गंभीर मामलों में वैज्ञानिक जांच, जब्ती प्रक्रिया और साक्ष्यों की कड़ी को मजबूत रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि आरोपी कानून की पकड़ से बच न सकें।फिलहाल कोर्ट के फैसले के बाद तीनों आरोपियों को राहत मिल गई है। वहीं, पुलिस कार्रवाई और जांच की गुणवत्ता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।