सिस्टम में अनुमति का रिकॉर्ड नहीं, चीफ सिटी प्लानर के नाम से जारी हुई फर्जी बिल्डिंग परमिशन; निगम ने शुरू की जांच
नगर निगम में बिल्डिंग परमिशन से जुड़ा फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। चीफ सिटी प्लानर के नाम से ऐसी बिल्डिंग परमिशन जारी होने का मामला सामने आया है, जिसका रिकॉर्ड नगर निगम के सिस्टम में मौजूद ही नहीं है। मामला सामने आने के बाद निगम प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, एक बिल्डिंग की अनुमति से संबंधित दस्तावेज सामने आने के बाद अधिकारियों को उस पर संदेह हुआ। दस्तावेज में चीफ सिटी प्लानर के नाम और अनुमति से जुड़ी जानकारी दर्ज थी, लेकिन जब इसकी जांच नगर निगम के ऑनलाइन सिस्टम और संबंधित रिकॉर्ड में की गई तो वहां ऐसी किसी अनुमति का पता नहीं चला।
रिकॉर्ड में अनुमति नहीं मिलने के बाद अधिकारियों ने दस्तावेज की वास्तविकता की जांच शुरू कर दी है। निगम अब यह पता लगाने में जुटा है कि फर्जी बिल्डिंग परमिशन किसने तैयार की और इसे जारी करने के पीछे कौन लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस अनुमति के आधार पर कहीं निर्माण कार्य तो नहीं कराया जा रहा है।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि फर्जी अनुमति में नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी के नाम का इस्तेमाल किया गया है। यदि दस्तावेज फर्जी साबित होता है तो इससे निगम की कार्यप्रणाली और अनुमति प्रक्रिया की निगरानी पर भी सवाल उठ सकते हैं।
जांच में दस्तावेज पर दर्ज अनुमति संख्या, तारीख, संबंधित संपत्ति का विवरण और अन्य जानकारियों का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से यह भी देखा जा रहा है कि अनुमति प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल रिकॉर्ड में किसी स्तर पर छेड़छाड़ हुई है या दस्तावेज पूरी तरह बाहर से तैयार किया गया है।
नगर निगम इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि फर्जी अनुमति तैयार करने वालों ने इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया। यदि किसी व्यक्ति ने इस दस्तावेज के आधार पर निर्माण कराया या किसी अन्य विभाग से लाभ लेने का प्रयास किया है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। जरूरत पड़ने पर मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
फिलहाल नगर निगम के स्तर पर दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच जारी है। चीफ सिटी प्लानर के नाम से जारी बताई जा रही इस बिल्डिंग परमिशन का सिस्टम में कोई रिकॉर्ड नहीं मिलने से मामला गंभीर हो गया है। जांच के बाद फर्जीवाड़े की पूरी तस्वीर सामने आने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होने की उम्मीद है।