गुना में कम उम्र में शादी की परंपरा अब भी कायम: हर चार में करीब एक युवती का विवाह 18 साल से पहले, NFHS-6 के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
गुना जिले में कानून और लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद बाल विवाह की परंपरा पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़ों के मुताबिक, जिले में 20 से 24 वर्ष की उम्र की करीब हर चार में एक युवती की शादी 18 साल की कानूनी उम्र पूरी होने से पहले हो गई थी। आंकड़े बताते हैं कि कम उम्र में विवाह की समस्या अभी भी सामाजिक स्तर पर चुनौती बनी हुई है।
बाल विवाह को रोकने के लिए देश में कानून लागू है। इसके साथ ही प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से लोगों को लगातार जागरूक किया जाता है कि लड़कियों की शादी निर्धारित कानूनी उम्र के बाद ही की जाए। इसके बावजूद ग्रामीण और सामाजिक स्तर पर चली आ रही कुछ परंपराओं और सोच के कारण कम उम्र में शादी के मामले सामने आते रहे हैं।
20 से 24 वर्ष की युवतियों पर आधारित आंकड़े
NFHS-6 के आंकड़े 20 से 24 वर्ष की उम्र की महिलाओं के विवाह की उम्र से जुड़ी स्थिति को सामने रखते हैं। इनमें करीब 25 प्रतिशत यानी हर चार में लगभग एक युवती ऐसी मिली, जिसका विवाह 18 वर्ष की कानूनी उम्र से पहले हो चुका था। यह आंकड़ा बताता है कि बाल विवाह रोकने के प्रयासों के बावजूद समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है।
कम उम्र में विवाह का असर लड़कियों की शिक्षा और उनके आगे के अवसरों पर भी पड़ सकता है। शादी जल्दी होने के कारण कई लड़कियों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है। इसके अलावा कम उम्र में पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ने से उनके व्यक्तिगत और आर्थिक विकास के अवसर भी सीमित हो सकते हैं।
जागरूकता के बावजूद चुनौती बरकरार
बाल विवाह रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाती है। प्रशासन की ओर से भी बाल विवाह की सूचना मिलने पर कार्रवाई का प्रावधान है।
इसके बावजूद केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। सामाजिक सोच में बदलाव और परिवारों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। खासतौर पर बेटियों की शिक्षा को जारी रखने और उन्हें कम उम्र में शादी के बजाय आगे पढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के अवसर देने पर जोर दिया जाता है।
कानूनी उम्र से पहले विवाह पर रोक
भारत में लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम कानूनी उम्र 18 वर्ष निर्धारित है। इससे कम उम्र में होने वाला विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। प्रशासन और संबंधित विभाग ऐसे मामलों को रोकने के लिए कार्रवाई कर सकते हैं।
गुना में सामने आए NFHS-6 के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान और कानूनी कार्रवाई के साथ सामाजिक स्तर पर भी लगातार प्रयास की जरूरत है। परिवारों को बेटियों की शिक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करना इस समस्या को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।