×

दिव्यांग का स्कूल 3 किमी दूर, बस सुविधा की कमी से परेशानी; रायसेन में एक दिन छात्र तो दूसरे दिन छात्राएं जाएंगी स्कूल

 

मध्य प्रदेश में स्कूली विद्यार्थियों की सुविधाओं को लेकर दो अलग-अलग जिलों से तस्वीर सामने आई है। शिवपुरी में एक दिव्यांग विद्यार्थी का स्कूल उसके घर से करीब 3 किलोमीटर दूर है, जिससे उसे स्कूल पहुंचने में परेशानी हो रही है। वहीं रायसेन में विद्यार्थियों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए उपलब्ध बसों की कमी के चलते अलग-अलग दिन छात्र और छात्राएं बस से स्कूल जाएंगी।

शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को स्कूल तक सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से पहुंचाना जरूरी है। खासकर दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए परिवहन की सुविधा और स्कूल की दूरी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में शिवपुरी और रायसेन की स्थिति व्यवस्था के सामने चुनौती पेश करती है।

शिवपुरी में दिव्यांग विद्यार्थी का स्कूल 3 किमी दूर

शिवपुरी में दिव्यांग विद्यार्थी को पढ़ाई के लिए करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित स्कूल जाना पड़ता है। दूरी अधिक होने के कारण विद्यार्थी और उसके परिवार को रोजाना स्कूल आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सामान्य बच्चों की तुलना में स्कूल तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता होती है। यदि स्कूल घर से दूर हो और परिवहन की उचित व्यवस्था न हो तो उनकी शिक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है।

परिवार की ओर से स्कूल तक पहुंचने की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है, ताकि विद्यार्थी नियमित रूप से पढ़ाई कर सके और उसे आने-जाने में परेशानी न हो।

रायसेन में बसों की कमी

रायसेन में भी विद्यार्थियों के परिवहन को लेकर अलग समस्या सामने आई है। यहां बसों की संख्या सीमित होने के कारण सभी विद्यार्थियों को एक साथ स्कूल पहुंचाना संभव नहीं हो पा रहा है।

व्यवस्था के तहत एक दिन छात्र बस से स्कूल जाएंगे, जबकि अगले दिन छात्राओं को बस की सुविधा दी जाएगी। इस तरह उपलब्ध परिवहन संसाधनों का उपयोग बारी-बारी से करने की योजना बनाई गई है।

हालांकि, विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था कितनी सुविधाजनक होगी, इस पर सवाल उठ रहे हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को नियमित शिक्षा के लिए हर दिन स्कूल पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में परिवहन की कमी का असर उनकी पढ़ाई पर पड़ सकता है।

परिवहन व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत

दोनों जिलों की स्थिति बताती है कि विद्यार्थियों के लिए स्कूल तक पहुंचने की सुविधा अभी भी कई जगह चुनौती बनी हुई है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था और दूरदराज के क्षेत्रों के बच्चों के लिए पर्याप्त बसों की जरूरत है।

अभिभावकों की मांग है कि शिक्षा विभाग स्थानीय स्तर पर विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों का आकलन करे और उसी के अनुसार परिवहन सुविधा उपलब्ध कराए। खासकर दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूल की दूरी को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्था की जानी चाहिए।

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो

शिक्षा का अधिकार तभी प्रभावी हो सकता है जब बच्चों को स्कूल तक पहुंचने में परेशानी न हो। यदि किसी दिव्यांग विद्यार्थी को रोजाना 3 किलोमीटर दूर जाना पड़े या बस की कमी के कारण छात्र और छात्राओं को अलग-अलग दिन स्कूल भेजना पड़े, तो व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।

अब उम्मीद है कि संबंधित विभाग इन समस्याओं का स्थायी समाधान तलाशेंगे। शिवपुरी में दिव्यांग विद्यार्थी के लिए परिवहन सुविधा और रायसेन में पर्याप्त बसों की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को नियमित रूप से स्कूल जाने में राहत मिल सकती है।