राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की गाथा अब स्कूलों में पढ़ाई जाएगी, CM मोहन यादव ने जबलपुर में किया ऐलान
मध्य प्रदेश के स्कूली विद्यार्थियों को अब 1857 की क्रांति के महानायकों राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के संघर्ष और बलिदान की गाथा पढ़ने को मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को जबलपुर में इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि दोनों वीरों के योगदान और बलिदान को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी उनके इतिहास से परिचित हो सके।
मुख्यमंत्री राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने दोनों शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
1857 की क्रांति में निभाई थी अहम भूमिका
राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह को 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारियों में गिना जाता है। दोनों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। उनके बलिदान की स्मृति में हर साल बलिदान दिवस मनाया जाता है।
जबलपुर और आसपास के क्षेत्र में दोनों का इतिहास विशेष महत्व रखता है। उनके संघर्ष और अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध को मध्य प्रदेश के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
नई पीढ़ी तक पहुंचेगी बलिदान की गाथा
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब दोनों क्रांतिकारियों के जीवन, संघर्ष और बलिदान को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश के योगदान के बारे में जानकारी मिलने की बात कही गई है।
सरकार की ओर से पाठ्यक्रम में किस कक्षा और किस विषय के तहत इसे शामिल किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी आगे सामने आने की उम्मीद है।
प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी श्रद्धांजलि
बलिदान दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर पहुंचकर राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उन्होंने दोनों वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे महानायकों के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। स्कूल पाठ्यक्रम में उनकी गाथा शामिल किए जाने से विद्यार्थियों को उनके संघर्ष और देश के लिए दिए गए बलिदान को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।