इंदौर में 'शब-ए-मालवा' का सुकून गायब: भीषण गर्मी के बीच तपती रातों ने छीनी नींद, रिसर्च में सामने आया बड़ा खतरा
कभी अपनी ठंडी और सुहानी रातों के लिए पहचाना जाने वाला इंदौर अब भीषण गर्मी और तपती रातों की मार झेल रहा है। 'शब-ए-मालवा' के नाम से मशहूर शहर में अब रात के समय भी तापमान में पर्याप्त गिरावट नहीं हो रही, जिससे लोगों की नींद और स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण रातें पहले की तुलना में अधिक गर्म होती जा रही हैं।
हाल ही में दुनिया के 1335 शहरों पर किए गए एक अध्ययन में यह सामने आया है कि बढ़ता वैशिक तापमान और गर्म रातें लोगों की नींद की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। पर्याप्त और गहरी नींद नहीं मिलने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
रात का तापमान बना चिंता का कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, दिन की गर्मी से अधिक चिंता की बात यह है कि रात में भी तापमान सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच रहा। शरीर को आराम और रिकवरी के लिए अपेक्षाकृत ठंडे वातावरण की जरूरत होती है, लेकिन गर्म रातों में शरीर का तापमान सामान्य नहीं हो पाता, जिससे नींद बार-बार टूटती है और पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता।इंदौर में भी पिछले कुछ समय से यही स्थिति देखने को मिल रही है। दिनभर की गर्मी के बाद रात में भी उमस और गर्म हवाओं के कारण लोगों को राहत नहीं मिल रही।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
अध्ययन के मुताबिक, लगातार खराब नींद से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इनमें तनाव, थकान, चिड़चिड़ापन, उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी बीमारियां और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां शामिल हैं। बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।डॉक्टरों का कहना है कि यदि रात में पर्याप्त नींद नहीं मिलती है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है और कार्यक्षमता में कमी आने लगती है।
जलवायु परिवर्तन का बढ़ता असर
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण केवल दिन का तापमान ही नहीं, बल्कि रात का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। शहरों में तेजी से बढ़ता कंक्रीट, हरित क्षेत्र में कमी और शहरीकरण इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।विशेषज्ञों का सुझाव है कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने, ऊर्जा दक्ष भवनों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के उपायों को अपनाने से लंबे समय में इस समस्या के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीने, सोने से पहले हल्का भोजन करने, कमरे को यथासंभव ठंडा रखने और नियमित नींद का समय बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि लंबे समय तक नींद से जुड़ी समस्या बनी रहती है तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।'शब-ए-मालवा' की ठंडी रातों के लिए प्रसिद्ध इंदौर में तपती रातों का बढ़ता असर अब केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।