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हाई कोर्ट का सवाल- जज का नंबर सेव नहीं था तो कॉल कैसे लगी? मामले की सुनवाई में उठे कई सवाल

 

एक मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एक अहम सवाल उठाते हुए पूछा कि जब किसी व्यक्ति के मोबाइल में जज का नंबर सेव ही नहीं था, तो आखिर कॉल कैसे लग गई? कोर्ट ने इस तकनीकी पहलू को लेकर संबंधित पक्ष से जवाब मांगा है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कॉल रिकॉर्ड और मोबाइल नंबर से जुड़े तथ्यों पर ध्यान दिया। कोर्ट ने पूछा कि यदि मोबाइल फोन में नंबर सेव नहीं था, तो संबंधित व्यक्ति तक जज का नंबर पहुंचा कैसे और बातचीत किस आधार पर हुई? इस सवाल के बाद मामले में तकनीकी साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

कोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले में तथ्यों की पुष्टि बेहद जरूरी है। केवल आरोप या दावे के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ऐसे में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच जरूरी होगी।

कॉल रिकॉर्ड की जांच पर जोर

सुनवाई के दौरान अदालत ने मोबाइल कॉल से जुड़े रिकॉर्ड को अहम माना। कोर्ट यह जानना चाहता है कि कॉल किस नंबर से की गई, किस समय हुई और दोनों पक्षों के बीच संपर्क किस परिस्थिति में हुआ।

अदालत ने संबंधित पक्षों को इस मामले में स्पष्ट जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। अब मामले में तकनीकी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

मामले में उठे कई सवाल

हाई कोर्ट के इस सवाल के बाद पूरे मामले को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। अगर नंबर सेव नहीं था तो कॉल कैसे कनेक्ट हुई, नंबर किस माध्यम से मिला और बातचीत का उद्देश्य क्या था, इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालतों में ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य का महत्व लगातार बढ़ रहा है। मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक जानकारी किसी भी मामले की दिशा बदल सकती है।

फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच और रिकॉर्ड के आधार पर आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। अब अगली सुनवाई में संबंधित पक्षों की ओर से इस सवाल का जवाब और अधिक स्पष्ट हो सकता है।