उज्जैन में भक्ति और उल्लास के साथ निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, वीडियो में जाने पहली बार तीन अलग-अलग रथों पर विराजे महाप्रभु
मध्य प्रदेश के उज्जैन समेत कई जिलों में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ निकाली गई। ढोल-नगाड़ों, भजन-कीर्तन, जयकारों और पुष्पवर्षा के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा नगर भ्रमण पर निकले। रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने शामिल होकर भगवान के दर्शन किए और रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त किया। इस बार उज्जैन के इस्कॉन मंदिर की रथयात्रा कई मायनों में खास रही। पहली बार भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को अलग-अलग रथों पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया गया। इस अनूठे दृश्य ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
तीन अलग-अलग रथों पर विराजे भगवान
रथयात्रा में भगवान बलभद्र 'तालध्वज' रथ पर, देवी सुभद्रा 'दर्पदलन' रथ पर और भगवान जगन्नाथ सबसे भव्य एवं 35 फीट ऊंचे 'नंदीघोष' रथ पर विराजमान हुए। तीनों रथों को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी सजावट और धार्मिक प्रतीकों से सजाया गया था।रथों के आगे भजन मंडलियां संकीर्तन कर रही थीं, जबकि श्रद्धालु "जय जगन्नाथ" के जयघोष के साथ नृत्य करते हुए भगवान के स्वागत में शामिल हुए।
जापानी धागों और मोतियों से बनी विशेष पोशाक
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के लिए इस बार विशेष दिव्य पोशाक तैयार की गई है। बंगाल के कुशल कारीगरों ने करीब ढाई लाख रुपए की लागत से इन पोशाकों का निर्माण किया है।इन पोशाकों की खासियत यह है कि इनमें जापान से मंगाए गए विशेष धागों और मोतियों का इस्तेमाल किया गया है। आकर्षक परिधानों में सजे भगवान के दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शहर के प्रमुख मार्गों से निकली यात्रा
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा इंदिरा नगर स्थित इस्कॉन मंदिर से शुरू होकर फ्रीगंज, टॉवर चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं ने भगवान की आरती उतारी, पुष्पवर्षा की और प्रसाद वितरित किया।यात्रा के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन की विशेष व्यवस्था रही। जगह-जगह स्वयंसेवकों को भी तैनात किया गया था ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
भक्ति में डूबा उज्जैन, हर ओर गूंजे जयकारे
रथयात्रा के दौरान पूरा शहर भक्तिमय माहौल में नजर आया। महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल हुए। कई स्थानों पर धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं ने श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, शरबत और प्रसाद की व्यवस्था भी की।भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और आस्था का भी प्रतीक मानी जाती है। उज्जैन में निकली इस भव्य यात्रा ने एक बार फिर श्रद्धा, परंपरा और संस्कृति की अद्भुत झलक प्रस्तुत की।