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भोपाल के बड़े तालाब और कलियासोत डैम की हद तय, NGT में आज पेश होगी सर्वे रिपोर्ट; कई कब्जे मिले

 

भोपाल की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब और कलियासोत डैम की वास्तविक सीमा को लेकर तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सामने पेश की जाएगी। एनजीटी के आदेश के बाद गठित विशेष टीम ने करीब पांच दिनों तक दोनों जलस्रोतों की सीमा का विस्तृत सर्वे किया। इस दौरान ड्रोन की मदद से भी क्षेत्र की निगरानी और मैपिंग की गई। सर्वे में कई जगह ऐसे निर्माण और कब्जे सामने आए हैं, जो तालाब और डैम की निर्धारित सीमा के भीतर बताए जा रहे हैं।

विशेष टीम के सर्वे के दौरान बैरसिया विधायक विष्णु खत्री के फार्म हाउस का नाम भी सामने आया है। इसके अलावा तालाब और डैम की सीमा में कई रेस्टोरेंट तथा अन्य प्रकार के कब्जे पाए जाने की बात कही जा रही है। अब इन सभी स्थानों की जानकारी रिपोर्ट में शामिल कर एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर ट्रिब्यूनल संबंधित विभागों और प्रशासन से जवाब मांग सकता है या कार्रवाई को लेकर आगे के निर्देश जारी कर सकता है।

एनजीटी के आदेश के बाद शुरू हुए इस सर्वे को बड़े तालाब और कलियासोत डैम के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय से भोपाल के जलस्रोतों के आसपास बढ़ते निर्माण और अतिक्रमण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहर के विस्तार के साथ तालाबों और डैम के कैचमेंट एरिया में गतिविधियां बढ़ने से पर्यावरण और जल संरक्षण को लेकर चिंता भी जताई जाती रही है।

सर्वे के दौरान टीम ने मौके पर पहुंचकर जलस्रोतों की सीमा का आकलन किया। इसके लिए पारंपरिक सर्वे के साथ ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया, ताकि बड़े क्षेत्र की तस्वीर और वास्तविक स्थिति को अधिक स्पष्ट तरीके से रिकॉर्ड किया जा सके। ड्रोन से लिए गए डेटा और मौके पर जुटाई गई जानकारी को रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है।

अब सभी की नजर मंगलवार को होने वाली एनजीटी की सुनवाई पर है। माना जा रहा है कि सर्वे रिपोर्ट सामने आने के बाद ट्रिब्यूनल जलस्रोतों की सीमा में पाए गए निर्माण और कब्जों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। संबंधित विभागों से जवाब तलब करने के साथ ही अतिक्रमण हटाने, निर्माण की स्थिति स्पष्ट करने या पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अन्य निर्देश दिए जा सकते हैं।

बड़ा तालाब भोपाल की पहचान और शहर के प्रमुख जलस्रोतों में शामिल है, जबकि कलियासोत डैम भी शहर और आसपास के क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जल संरचना है। ऐसे में इन दोनों जलस्रोतों की सीमा में किसी भी तरह के अतिक्रमण और अनधिकृत निर्माण का मामला पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंगलवार की सुनवाई में एनजीटी की ओर से क्या निर्देश दिए जाते हैं, इस पर प्रशासन, पर्यावरण विभाग और स्थानीय लोगों की नजर रहेगी।