मौत के बाद भी मनरेगा में मजदूरी कर रहे मृतक, मुरैना की इमलिया पंचायत में सरकारी रिकॉर्ड ने चौंकाया
मुरैना की इमलिया ग्राम पंचायत से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मनरेगा व्यवस्था और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां कुछ ऐसे लोगों के नाम मजदूरी के रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिनकी मौत कई साल पहले हो चुकी है। यानी कागजों में ये मृतक आज भी मजदूरी कर रहे हैं और सरकारी योजना के तहत रोजगार हासिल कर रहे हैं।
मामला मनरेगा के मौजूदा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी-जीरामजी से जुड़ा बताया जा रहा है। पंचायत के रिकॉर्ड में कुछ ऐसे श्रमिकों के नाम दिखाई दे रहे हैं, जो वर्षों पहले दुनिया छोड़ चुके हैं। इनमें कुछ लोगों की मृत्यु करीब 15 साल पहले हो चुकी है, जबकि कुछ की मौत 3 से 4 साल पहले हुई थी। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम मजदूरी करने वाले श्रमिकों की सूची में बने हुए हैं।
मौत के बाद भी नहीं हुआ श्रमिक रिकॉर्ड से नाम बाहर
सरकारी योजनाओं में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके नाम को संबंधित रिकॉर्ड से हटाने और जॉब कार्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया होती है। लेकिन इमलिया ग्राम पंचायत में सामने आए मामले से लगता है कि कई मृत श्रमिकों के रिकॉर्ड लंबे समय से अपडेट नहीं किए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों की मृत्यु कई साल पहले हो चुकी है, उनके नाम पर रोजगार से जुड़े रिकॉर्ड कैसे सक्रिय बने रहे। यदि इन नामों पर वास्तविक मजदूरी भुगतान भी हुआ है तो मामला और गंभीर हो जाता है। वहीं यदि सिर्फ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हैं और भुगतान नहीं हुआ, तब भी पंचायत स्तर पर रिकॉर्ड सत्यापन और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
15 साल पहले मौत, फिर भी रिकॉर्ड में मजदूरी
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ श्रमिकों की मौत करीब 15 साल पहले हो चुकी है। इसके बावजूद उनके नाम सरकारी रिकॉर्ड से पूरी तरह बाहर नहीं हुए। कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनकी मृत्यु 3 से 4 साल पहले हुई थी, लेकिन उनके नाम अभी भी मजदूरी से जुड़े रिकॉर्ड में नजर आ रहे हैं।
इससे यह सवाल उठ रहा है कि ग्राम पंचायत स्तर पर श्रमिकों के जॉब कार्ड और परिवार के सदस्यों की जानकारी का नियमित सत्यापन किस तरह किया जा रहा है। क्या पंचायत में मृत्यु के बाद संबंधित विभागों से जानकारी अपडेट नहीं की जाती, या फिर रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई।
जांच हुई तो खुल सकती है गड़बड़ी की पूरी परत
मामले की गंभीरता को देखते हुए यदि मृत श्रमिकों के नाम से जारी मस्टर रोल, उपस्थिति और मजदूरी भुगतान का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। जांच में यह पता लगाया जा सकता है कि मृतकों के नाम केवल पुराने रिकॉर्ड में बने हुए हैं या उनके नाम पर वास्तव में काम दर्शाया गया और भुगतान भी किया गया।
यदि मृत व्यक्तियों के नाम पर फर्जी हाजिरी लगाकर मजदूरी निकाली गई है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला बन सकता है। वहीं केवल रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने की स्थिति में संबंधित कर्मचारियों और पंचायत स्तर की निगरानी व्यवस्था की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल
मनरेगा जैसी रोजगार योजना में श्रमिकों की उपस्थिति, काम और भुगतान का रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में मृत व्यक्तियों के नाम लंबे समय तक रिकॉर्ड में बने रहना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। इमलिया ग्राम पंचायत का यह मामला सामने आने के बाद अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन रिकॉर्ड की जांच कराता है या नहीं और मृत श्रमिकों के नाम पर किसी तरह का भुगतान हुआ है या नहीं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इंसान मौत के बाद वापस नहीं लौटता, तो सरकारी रिकॉर्ड में मृत लोग आज भी मजदूरी कैसे कर रहे हैं। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह महज रिकॉर्ड अपडेट करने में हुई लापरवाही है या फिर सरकारी योजना में किसी बड़े फर्जीवाड़े का मामला।