105 फीट ऊंचे ‘रावण’ का दहन: 10 सिरों का गुरूर... 1 चिंगारी में चूर, आतिशबाजी से जगमगाया आसमान
विजयादशमी के अवसर पर 105 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन आकर्षण का केंद्र रहा। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक दशहरा पर्व पर रावण के पुतले को जलते देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। जैसे ही पुतले में आग लगाई गई, कुछ ही देर में रावण के दस सिरों वाला विशाल पुतला आग की लपटों में घिर गया। आतिशबाजी की चमक और लोगों के जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा माहौल उत्सवमय हो गया। रावण के दहन के साथ ही अहंकार और अधर्म के अंत का संदेश दिया गया।
दशहरे पर रावण दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हर साल देशभर में इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान रावण के साथ कई स्थानों पर मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का भी दहन किया जाता है।
105 फीट ऊंचे पुतले को देखने उमड़े लोग
विशालकाय रावण का पुतला लोगों के बीच खास आकर्षण बना रहा। इसकी ऊंचाई और दस सिरों की बनावट ने दर्शकों का ध्यान खींचा। शाम होते ही आयोजन स्थल पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। बच्चे, युवा और बुजुर्ग अपने परिवारों के साथ रावण दहन देखने पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। रावण दहन से पहले दर्शकों ने पुतले के साथ तस्वीरें लीं और आतिशबाजी का इंतजार किया। जैसे ही दहन शुरू हुआ, लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
एक चिंगारी से जल उठा अहंकार का प्रतीक
रावण के पुतले में आग लगते ही लपटें तेजी से उठने लगीं। देखते ही देखते दस सिरों वाला विशाल पुतला जलने लगा। आतिशबाजी के बीच आसमान रोशनी से जगमगा उठा और दर्शकों ने इस पल का आनंद लिया।
रावण के दस सिरों को अक्सर उसके ज्ञान, शक्ति और अहंकार से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार, रावण अत्यंत विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार और गलत निर्णयों के कारण विनाश की ओर बढ़ा। इसलिए रावण दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार और बुराइयों को त्यागने का प्रतीक भी माना जाता है।
दशहरा देता है बुराई छोड़ने का संदेश
दशहरा भगवान श्रीराम की ओर से रावण पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर धर्म और न्याय की स्थापना की थी। इसी घटना की याद में हर साल विजयादशमी पर रावण दहन किया जाता है।
यह पर्व लोगों को सिखाता है कि शक्ति और ज्ञान के बावजूद यदि व्यक्ति अहंकार, अन्याय और गलत रास्ते पर चलता है, तो उसका अंत निश्चित हो सकता है। जीवन में सत्य, संयम और सदाचार का महत्व इस पर्व के माध्यम से समझाया जाता है।
आतिशबाजी और जयकारों के बीच संपन्न हुआ आयोजन
105 फीट ऊंचे रावण के दहन के साथ दशहरा समारोह ने यादगार रूप ले लिया। पुतले को जलते देखने के लिए जुटे लोगों ने उत्साह के साथ पर्व मनाया। आतिशबाजी और जय श्रीराम के जयकारों के बीच आयोजन का समापन हुआ।
रावण के दस सिरों का गुरूर एक चिंगारी में खत्म होने का दृश्य लोगों को यही संदेश देता नजर आया कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में सत्य और धर्म की ही जीत होती है।