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इंदौर में 51 एकड़ जमीन पर मॉल बनाने का करार सवालों के घेरे में, कांग्रेस ने 490 करोड़ के निवेश पर उठाए सवाल

 

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने वर्ष 2007 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मीट के दौरान इंदौर के कुमेड़ी में 51 एकड़ जमीन पर मॉल बनाने के लिए हुए करार को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि परियोजना के लिए 490 करोड़ रुपये के निवेश और करीब 4 हजार लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन कंपनी ने मॉल का निर्माण नहीं किया और जमीन बेच दी।

कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि निवेश सम्मेलन के दौरान बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन परियोजना को लेकर किए गए दावों और उसके वास्तविक परिणामों की जांच होनी चाहिए।

2007 की ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मीट के करार पर सवाल

कांग्रेस के मुताबिक, वर्ष 2007 में हुई ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मीट के दौरान इंदौर के कुमेड़ी क्षेत्र में 51 एकड़ जमीन पर मॉल विकसित करने के लिए करार किया गया था। इस परियोजना में 490 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित था। साथ ही, करीब 4 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का वादा भी किया गया था।

मुकेश नायक ने आरोप लगाया कि कंपनी ने प्रस्तावित परियोजना को पूरा नहीं किया। कांग्रेस का दावा है कि मॉल बनाने के बजाय जमीन बेच दी गई। पार्टी ने इस पूरे मामले में निवेश के उद्देश्य, जमीन के इस्तेमाल और रोजगार से जुड़े वादों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

रोजगार और निवेश के वादों पर उठे सवाल

कांग्रेस ने कहा कि निवेश सम्मेलनों का उद्देश्य प्रदेश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना होता है। ऐसे में यदि किसी परियोजना के लिए बड़े निवेश और रोजगार का वादा किया गया था, लेकिन वह जमीन पर साकार नहीं हुआ, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

पार्टी ने इस मामले के तथ्यों की पड़ताल करने और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जरूरत पर जोर दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में जमीन की बिक्री की तारीख, कंपनी का नाम, करार की शर्तों और संबंधित सरकारी विभागों की कार्रवाई का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

जांच और जवाबदेही का मुद्दा

कुमेड़ी की जमीन से जुड़ा यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस के आरोपों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि प्रस्तावित मॉल परियोजना को लेकर किए गए वादों पर कितना अमल हुआ और जमीन के उपयोग में क्या बदलाव किए गए।

फिलहाल, ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए करार, जमीन के रिकॉर्ड और संबंधित विभागों के दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी। संबंधित कंपनी और सरकारी अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।