शराब के नशे में स्कूल पहुंचा शिक्षक! परिसर में ही पीने का आरोप, सीधी में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
मध्य प्रदेश के सीधी जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। सिहावल जनपद पंचायत के ग्राम डिहुली नंबर-4 स्थित प्राथमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक दिनेश कोल पर शराब के नशे में धुत होकर स्कूल पहुंचने और परिसर में ही शराब पीने का आरोप लगा है। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और स्कूलों में शिक्षकों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बताया जा रहा है कि शिक्षक के कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। आरोप है कि शिक्षक ने स्कूल परिसर में ही शराब का सेवन किया। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल विभागीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के लिए भी बेहद गंभीर स्थिति है।
बच्चों के सामने शराब पीने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक दिनेश कोल स्कूल समय में नशे की हालत में रहते हैं। इतना ही नहीं, उनके द्वारा स्कूल परिसर में शराब पीने की बात भी कही जा रही है। स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों के सामने शिक्षक का इस तरह का व्यवहार शिक्षा के माहौल पर गंभीर असर डाल सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालय में छोटे बच्चे पढ़ने आते हैं और शिक्षक उनके लिए आदर्श होते हैं। ऐसे में यदि कोई शिक्षक ही स्कूल परिसर में शराब का सेवन करता है तो इससे बच्चों और अभिभावकों के बीच गलत संदेश जाता है।
शिक्षा विभाग की निगरानी पर सवाल
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक के व्यवहार और उपस्थिति की निगरानी समय पर की जानी चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
स्थानीय लोगों ने मामले की जांच कर शिक्षक के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल बच्चों के भविष्य को संवारने की जगह है और वहां किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
शिक्षक पर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। शिक्षा विभाग की ओर से मामले की जांच कराई जाती है तो शिक्षक के स्कूल में पहुंचने की स्थिति, परिसर में शराब सेवन के आरोप और अन्य तथ्यों की पुष्टि की जा सकती है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल यह मामला सामने आने के बाद डिहुली नंबर-4 के प्राथमिक स्कूल और वहां की शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के आचरण और अनुशासन की निगरानी कितनी प्रभावी है। बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ऐसी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई जरूरी है।