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भोपाल में टैक्सी चालकों का आरोप: आंदोलन के बाद बढ़ा था किराया, फिर एग्रीगेटर कंपनियों ने वापस घटाए रेट; संघ ने उठाई मांग

 

भोपाल टैक्सी चालक संघ (भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध) ने एग्रीगेटर कंपनियों की किराया नीति को लेकर एक बार फिर नाराजगी जताई है। संघ का दावा है कि 23, 24 और 25 जून को एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के बाद कंपनियां दबाव में आ गई थीं और उन्होंने किराए में कुछ सुधार किया था। लेकिन यह बदलाव ज्यादा समय तक नहीं टिक सका और कंपनियां दोबारा पुराने किराए पर लौट गईं।

टैक्सी चालक संघ का आरोप है कि आंदोलन के दौरान चालकों की मांगों को देखते हुए एग्रीगेटर कंपनियों ने किराए में आंशिक बढ़ोतरी की थी। इससे चालकों को उम्मीद थी कि उनकी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो गई।

एयरपोर्ट राइड बहिष्कार का असर

संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, जून में किए गए एयरपोर्ट राइड बहिष्कार का असर देखने को मिला था। बड़ी संख्या में चालकों के इस आंदोलन में शामिल होने के बाद कंपनियों ने किराया व्यवस्था में बदलाव किया था।

चालकों का कहना है कि ईंधन, वाहन रखरखाव, बीमा और अन्य खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाला किराया उस अनुपात में नहीं बढ़ रहा है। इससे टैक्सी चालकों की आमदनी प्रभावित हो रही है।

कंपनियों पर मनमानी का आरोप

टैक्सी चालक संघ ने आरोप लगाया कि एग्रीगेटर कंपनियां किराया तय करने में पारदर्शिता नहीं बरत रही हैं। चालकों का कहना है कि कई बार यात्रियों से ज्यादा किराया लिया जाता है, लेकिन उसका उचित हिस्सा चालकों तक नहीं पहुंचता।

संघ ने मांग की है कि किराया निर्धारण की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए और चालकों को उनके खर्च के अनुसार उचित भुगतान मिलना चाहिए।

आगे आंदोलन की चेतावनी

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। चालकों का कहना है कि वे अपनी आजीविका और अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

वहीं, एग्रीगेटर कंपनियों की ओर से इस मामले में अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि टैक्सी चालकों की मांगों पर कंपनियां क्या कदम उठाती हैं।