दिवाली पर मिठाई और चॉकलेट की दुकानों में बढ़ी रौनक, काजू कतली से लेकर चॉकलेट गिफ्टिंग तक का क्रेज
दीपावली के त्योहार पर बाजारों में खरीदारी का उत्साह देखने को मिल रहा है। घरों की सजावट और पूजा की तैयारियों के साथ मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी भी जोर पकड़ रही है। मिठाई और चॉकलेट की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ बढ़ने लगी है। कहीं पारंपरिक मिठाइयों में काजू कतली और ड्रायफ्रूट मिठाइयों की मांग है, तो कहीं चॉकलेट गिफ्टिंग लोगों की पसंद बन रही है।
दीपावली पर परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को मिठाई देकर शुभकामनाएं देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। समय के साथ इस परंपरा में नए विकल्प भी जुड़ गए हैं। अब लोग पारंपरिक मिठाइयों के साथ आकर्षक पैकिंग वाली चॉकलेट और गिफ्ट बॉक्स भी खरीद रहे हैं।
काजू कतली और ड्रायफ्रूट मिठाइयों की मांग
त्योहार के मौके पर काजू कतली मिठाई की पसंदीदा किस्मों में शामिल रहती है। इसके अलावा बादाम, पिस्ता और काजू से तैयार ड्रायफ्रूट मिठाइयों की भी मांग बनी हुई है। लोग इन्हें परिवार के लिए खरीदने के साथ रिश्तेदारों और परिचितों को उपहार में देने के लिए भी पसंद कर रहे हैं।
मिठाई की दुकानों पर अलग-अलग किस्मों और पैकिंग में उपलब्ध विकल्प ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। कई लोग पारंपरिक स्वाद को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहक नई वैरायटी की मिठाइयां खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।
चॉकलेट गिफ्टिंग का बढ़ रहा ट्रेंड
दीपावली पर चॉकलेट गिफ्टिंग भी एक नया चलन बनकर उभरी है। खासकर युवाओं और बच्चों के बीच चॉकलेट के आकर्षक पैक लोकप्रिय हो रहे हैं। बाजार में अलग-अलग डिजाइन और पैकिंग वाले चॉकलेट गिफ्ट बॉक्स लोगों को पसंद आ रहे हैं।
कई लोग पारंपरिक मिठाइयों के साथ चॉकलेट भी खरीद रहे हैं, ताकि उपहार में कुछ नया दिया जा सके। आकर्षक पैकेजिंग और अलग-अलग स्वाद के विकल्पों ने चॉकलेट को त्योहारों की खरीदारी का हिस्सा बना दिया है।
गिफ्ट पैक से बढ़ी बाजार की रौनक
दीपावली पर उपहार देने की परंपरा के चलते मिठाई और चॉकलेट के गिफ्ट पैक की मांग भी बढ़ रही है। लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार पैक चुन रहे हैं। दुकानदार भी ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं।
कुल मिलाकर इस दीपावली बाजार में पारंपरिक मिठाइयों और आधुनिक चॉकलेट गिफ्टिंग का मेल देखने को मिल रहा है। काजू कतली और ड्रायफ्रूट मिठाइयों का स्वाद बरकरार है, वहीं चॉकलेट के नए विकल्प त्योहार की खरीदारी को एक नया रंग दे रहे हैं।
पंचायत चुनाव के तीसरे चरण की वोटिंग आज पूरी हो गई। जयपुर जिले में आज 5 पंचायत समितियों की 133 ग्राम पंचायतों में वार्ड पंच और सरपंच पद के लिए वोटिंग करवाई गई। जहां करीब 87 फीसदी वोटर्स ने वोट डाले। इससे पहले 3 नंवबर को इन्हीं पंचायत समितियों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी, जिसमें 72.85 फीसदी वोटर्स ही वोट करने बूथों पर पहुंचे थे।
जयपुर में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण में 87% मतदान, 133 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच के लिए डाले गए वोट
राजस्थान में पंचायत चुनाव के तीसरे चरण का मतदान आज पूरा हो गया। जयपुर जिले की पांच पंचायत समितियों की 133 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए वोटिंग करवाई गई। मतदान के दौरान करीब 87 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही गांवों की सरकार चुनने के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हो गई।
तीसरे चरण के मतदान में मतदाताओं ने सुबह से ही बूथों पर पहुंचना शुरू कर दिया था। ग्रामीण क्षेत्रों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए लोगों में उत्साह देखने को मिला। मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की आवाजाही बनी रही। चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रशासन की ओर से मतदान व्यवस्था संचालित की गई।
133 ग्राम पंचायतों में हुआ मतदान
जयपुर जिले की पांच पंचायत समितियों के अंतर्गत आने वाली 133 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मतदान कराया गया। इन पदों पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की किस्मत अब मतपेटियों में बंद हो गई है। करीब 87 प्रतिशत मतदान दर्ज होने के साथ तीसरे चरण की वोटिंग पूरी हुई।
ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले चुनावों में स्थानीय मुद्दे अहम रहते हैं। गांवों में सड़क, पानी, बिजली, सफाई, नाली निर्माण और सरकारी योजनाओं से जुड़े कामों को लेकर मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन करते हैं।
3 नवंबर को जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए हुई थी वोटिंग
इससे पहले 3 नवंबर को इन्हीं पांच पंचायत समितियों में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए मतदान हुआ था। उस दिन कुल 72.85 प्रतिशत मतदाता ही वोट डालने बूथों तक पहुंचे थे।
तीसरे चरण में सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए हुए मतदान में करीब 87 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। इस तरह दोनों चरणों के मतदान प्रतिशत में अंतर देखने को मिला।
अब चुनाव परिणाम पर रहेगी नजर
मतदान पूरा होने के बाद अब प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की नजर परिणाम पर रहेगी। सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए मैदान में उतरे उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य मतगणना के बाद तय होगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में इन चुनावों को स्थानीय विकास और पंचायत व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। चुने गए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी गांवों में बुनियादी सुविधाओं और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की होगी।