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स्मार्ट क्लासरूम टेंडर में गड़बड़ी का आरोप: एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए निकाला टेंडर, दो अधिकारियों पर केस दर्ज

 

समग्र शिक्षा अभियान में स्मार्ट क्लासरूम की खरीद से जुड़े ऑनलाइन टेंडर में कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना ऐसा टेंडर जारी किया गया, जिससे एक ही कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले की जांच के बाद दो अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि स्मार्ट क्लासरूम से संबंधित टेंडर प्रक्रिया निर्धारित नियमों और प्रशासनिक मंजूरी के बिना आगे बढ़ाई गई। आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गईं कि केवल एक विशेष कंपनी को इसका लाभ मिल सके। इससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए।

शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके आधार पर दो अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि टेंडर प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा किसी कंपनी को लाभ पहुंचाने के पीछे क्या उद्देश्य था।

बताया जा रहा है कि स्मार्ट क्लासरूम परियोजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना था। लेकिन टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे गंभीर मुद्दे भी उजागर हो सकते हैं।

जांच एजेंसियां टेंडर से जुड़े सभी दस्तावेज, मंजूरी की फाइलें, तकनीकी शर्तें और संबंधित अधिकारियों के निर्णयों की समीक्षा कर रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस प्रक्रिया में किसी कंपनी के साथ मिलीभगत की गई थी या नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया गया।

अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटनाक्रम के बाद सरकारी विभागों में ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।