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‘साहब! मैं जिंदा हूं…’ थाने पहुंची युवती, वीडियो में देंखे हत्या के आरोप में जेल गए पिता-भाई को मिली राहत

 

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस युवती को मृत मानकर उसके पिता और भाई को हत्या के आरोप में जेल भेज दिया गया था, वह अचानक जिंदा थाने पहुंच गई। युवती ने पुलिस के सामने पहुंचकर कहा, “साहब! मैं जिंदा हूं, मेरे पिता और भाई को छोड़ दीजिए।” इस घटनाक्रम के बाद पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया।मामला बुरहानपुर जिले के खकनार थाना क्षेत्र का है। थाना प्रभारी अभिषेक जाधव के मुताबिक, युवती शिवानी 24 अप्रैल को अचानक लापता हो गई थी। परिवार और पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रहे थे। इसी दौरान महाराष्ट्र के जलगांव जामोद इलाके में एक युवती की सिर कटी और जली हुई लाश बरामद हुई। शव की हालत इतनी खराब थी कि उसकी पहचान करना मुश्किल हो गया था।

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गुमशुदगी के आधार पर हुई पहचान

महाराष्ट्र पुलिस ने सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) में दर्ज गुमशुदगी के रिकॉर्ड के आधार पर जांच शुरू की। वहां दर्ज जानकारी में शिवानी के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई। इसके बाद महाराष्ट्र पुलिस बुरहानपुर पहुंची और खकनार पुलिस से संपर्क किया।पुलिस जांच और परिस्थितियों के आधार पर उस अज्ञात शव को शिवानी मान लिया गया। मामले में संदेह के आधार पर शिवानी के पिता बापूराव और भाई अजय को हिरासत में लिया गया। बाद में दोनों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर महाराष्ट्र के बुलढाणा जेल भेज दिया गया।

27 मई की रात थाने पहुंची शिवानी

पूरे मामले में उस समय बड़ा मोड़ आ गया जब 27 मई की रात शिवानी खुद खकनार थाने पहुंच गई। उसने पुलिस को बताया कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसके पिता तथा भाई निर्दोष हैं। युवती को सामने देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए।थाना प्रभारी अभिषेक जाधव ने बताया कि शिवानी के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और अब पूरे मामले की दोबारा जांच की जाएगी। साथ ही महाराष्ट्र पुलिस को भी इस बारे में सूचना दे दी गई है, ताकि जेल में बंद पिता और भाई की रिहाई की प्रक्रिया शुरू हो सके।

पुलिस जांच पर उठे सवाल

इस घटना के बाद पुलिस जांच प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बिना पुख्ता पहचान के शव को शिवानी मान लेना और उसी आधार पर परिवार के लोगों को गिरफ्तार करना अब जांच एजेंसियों के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर सकता है।कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी शव की पहचान केवल परिस्थितियों और गुमशुदगी रिपोर्ट के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। डीएनए जांच और अन्य वैज्ञानिक प्रमाणों के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जरूरी होता है।

अब सबसे बड़ा सवाल- आखिर वह शव किसका था?

शिवानी के जिंदा लौट आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि महाराष्ट्र में मिली वह सिर कटी और जली हुई लाश आखिर किस युवती की थी। पुलिस अब उस शव की असली पहचान करने में जुट गई है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस जांच व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं परिवार के लोग शिवानी के वापस लौट आने से राहत महसूस कर रहे हैं और पिता व भाई की जल्द रिहाई की उम्मीद कर रहे हैं।