ग्वालियर के शीतला माता मंदिर मेले में पसरा सन्नाटा, ट्रक हादसे के बाद अष्टमी-नवमी पर नहीं उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
ग्वालियर के सातऊ गांव स्थित शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर लाखों श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते थे। मंदिर परिसर में लगने वाला मेला लोगों की आस्था के साथ-साथ स्थानीय कारोबार का भी बड़ा केंद्र रहता था। खिलौनों, प्रसाद, झूलों और गृहस्थी के सामान की दुकानों पर दिनभर खरीदारी होती थी। लेकिन इस बार मेले में रौनक की जगह सन्नाटा पसरा हुआ है। 17 अक्टूबर की रात हुए ट्रक हादसे के बाद इस बार श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं दिखाई दे रही है।
हर साल अष्टमी-नवमी पर उमड़ती थी लाखों की भीड़
सातऊ गांव स्थित शीतला माता मंदिर में अष्टमी और नवमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। इन दिनों मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में मेले जैसा माहौल रहता है। परिवार के साथ आने वाले लोग पूजा-अर्चना के अलावा मेले में खरीदारी भी करते हैं।
बच्चों के लिए खिलौनों की दुकानें, प्रसाद की दुकानें, झूले और रोजमर्रा की जरूरतों का सामान बेचने वाले दुकानदारों के लिए यह समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। हर साल उमड़ने वाली भीड़ से पूरे इलाके में चहल-पहल बनी रहती थी।
ट्रक हादसे के बाद बदला मेले का माहौल
17 अक्टूबर की रात हुए ट्रक हादसे के बाद इस बार मंदिर मेले का माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। अष्टमी और नवमी जैसे प्रमुख अवसरों पर भी श्रद्धालुओं की संख्या कम रहने से मंदिर परिसर में सन्नाटा दिखाई दे रहा है।
हादसे के बाद मेले में भीड़ कम होने के कारणों और प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, हर साल श्रद्धालुओं से भरे रहने वाले क्षेत्र में इस बार अपेक्षाकृत कम चहल-पहल दिखाई दे रही है।
दुकानदारों के कारोबार पर भी असर
मेले में दुकान लगाने वाले कारोबारियों के लिए अष्टमी और नवमी का समय साल के सबसे अहम दिनों में शामिल रहता है। खिलौने, प्रसाद, झूले और गृहस्थी का सामान बेचने वाले दुकानदार इन दिनों अच्छी बिक्री की उम्मीद करते हैं।
लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की कम आवाजाही से दुकानों पर भी पहले जैसी भीड़ नजर नहीं आ रही है। मेले की रौनक कम होने का असर स्थानीय कारोबार पर पड़ने की आशंका है।
शीतला माता मंदिर से जुड़ा यह मेला धार्मिक आस्था के साथ ग्रामीण क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का भी हिस्सा है। हर साल यहां उमड़ने वाली भीड़ मंदिर और आसपास के बाजार को जीवंत बना देती थी। इस बार ट्रक हादसे के बाद बदले माहौल के बीच मेले की पुरानी रौनक गायब दिखाई दे रही है।