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श्राद्ध पक्ष आज से शुरू, 16 दिन तक श्रद्धालु करेंगे पितरों का तर्पण-पिंडदान; 60 साल बाद बना खास संयोग

 

हिंदू धर्म में पितरों को समर्पित श्राद्ध पक्ष यानी पितृ पक्ष की शुरुआत आज से हो रही है। अगले 16 दिनों तक श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए कर्मों का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार का श्राद्ध पक्ष ज्योतिषीय दृष्टि से भी खास बताया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण यह समय चर्चा में है। बताया जा रहा है कि इससे पहले वर्ष 1966 में इसी तरह के ग्रहों के पुनरावृत्ति योग में महालय श्राद्ध हुआ था।

16 दिनों तक चलेंगे श्राद्ध कर्म

पितृ पक्ष के दौरान लोग अपने पितरों की तिथि के अनुसार श्राद्ध करते हैं। इस अवधि में घरों, तीर्थ स्थलों और पवित्र नदियों के किनारे तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं।मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वजों का स्मरण करने और उनके निमित्त दान-पुण्य करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसी कारण इन दिनों को पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है।

ग्रहों की स्थिति को बताया जा रहा खास

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 1966 में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति और शनि सहित छह ग्रहों की विशेष पुनरावृत्ति स्थिति में महालय श्राद्ध हुआ था। इस बार भी इसी तरह के संयोग की चर्चा की जा रही है।हालांकि, ग्रहों के प्रभाव और धार्मिक मान्यताओं को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय मत हो सकते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहों की स्थिति और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं किया गया है।

तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व

श्राद्ध कर्म में तर्पण, पिंडदान, ब्राह्मण भोजन और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। लोग अपने पितरों को याद करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।देशभर में गया, हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और अन्य पवित्र स्थलों पर इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय स्तर पर भी लोग नदी, तालाब और धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पितरों का तर्पण करते हैं।

श्रद्धालुओं ने शुरू की तैयारियां

पितृ पक्ष शुरू होने के साथ ही घरों में श्राद्ध कर्म की तैयारियां शुरू हो गई हैं। लोग अपनी परंपरा और मान्यताओं के अनुसार पितरों का स्मरण कर धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।16 दिनों तक चलने वाले इस पर्व में अमावस्या का दिन विशेष महत्व रखता है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इस दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी तिथि ज्ञात नहीं होती।श्राद्ध पक्ष भारतीय परंपरा में पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु श्रद्धा और विश्वास के साथ अपने पितरों को याद करते हैं।