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शंकराचार्य का बयान: ‘खुद को राजनीति का चाणक्य समझने वालों को चेतावनी, शुद्ध हृदय वाले बच्चों से मत लड़ो’

 

शंकराचार्य ने राजनीतिक लोगों को लेकर एक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग खुद को राजनीति का चाणक्य समझते हैं और अपने आपको तीसमार खां मानते हैं, उन्हें चेतावनी है कि वे शुद्ध हृदय वाले बच्चों से न लड़ें। शंकराचार्य ने कहा कि शुद्धता के सामने किसी भी तरह की राजनीतिक चतुराई काम नहीं आएगी।

उन्होंने कहा, “जो लोग खुद को राजनीति का चाणक्य समझते हैं, जो अपने आपको तीसमार खां मानते हैं, उनको हमारी चेतावनी है कि शुद्ध हृदय वाले बच्चों से मत लड़ो। क्योंकि शुद्धता से जब लड़ोगे तो आपकी कोई भी चतुराई काम नहीं आएगी।”

शंकराचार्य ने आगे कहा कि ऐसे लोगों को बच्चों को परेशान नहीं करना चाहिए। उन्होंने अपील करते हुए कहा, “इसलिए इनको मत सताओ।” उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा हो रही है।बयान में शंकराचार्य ने किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया। उन्होंने अपने संबोधन में राजनीतिक चतुराई और शुद्धता के बीच तुलना करते हुए कहा कि साफ और निष्कलंक भाव रखने वाले लोगों के खिलाफ रणनीति या चालाकी प्रभावी नहीं होगी।

शंकराचार्य का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार चर्चा में रहती है। उनके बयान में इस्तेमाल किए गए ‘राजनीति का चाणक्य’ और ‘तीसमार खां’ जैसे शब्दों को राजनीतिक रणनीति और प्रभाव का दावा करने वाले लोगों के संदर्भ में देखा जा रहा है।हालांकि, शंकराचार्य ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि उनका इशारा किस व्यक्ति या समूह की ओर था। इसलिए उनके बयान के संदर्भ और निशाने को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो सकती हैं। बयान का मूल संदेश शुद्ध हृदय वाले बच्चों को परेशान न करने और उनके खिलाफ राजनीतिक चतुराई का इस्तेमाल न करने की अपील पर केंद्रित रहा।