जेन-जी आंदोलन पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, वीडियो में बोले- शुद्ध हृदय वाले बच्चों से मत लड़ो
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने जेन-जी के आंदोलन को लेकर सरकार और राजनीतिक नेतृत्व को चेतावनी दी है। रविवार को जबलपुर पहुंचे शंकराचार्य ने कहा कि जो लोग खुद को राजनीति का चाणक्य और तीसमार खां समझते हैं, उन्हें शुद्ध हृदय वाले बच्चों से नहीं लड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब शुद्धता से लड़ाई होती है तो राजनीतिक चतुराई काम नहीं आती। इसलिए जेन-जी को परेशान करने के बजाय उनकी बातों और मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
शंकराचार्य ने कहा कि जिस सरकार के बारे में दावा किया जाता था कि उसके कार्यकाल में इस्तीफे नहीं होते, जेन-जी ने वहां इस्तीफा करवाकर दिखा दिया। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े अनुभवी नेता जो नहीं कर पाए, वह जेन-जी ने करके दिखाया है। उनके मुताबिक युवाओं के आंदोलन को केवल विरोध के तौर पर देखने के बजाय उसके पीछे की पीड़ा को समझने की जरूरत है।
उन्होंने जेन-जी की स्थिति की तुलना एक छोटे बच्चे से करते हुए कहा कि जिस तरह बच्चे के पैर में कांटा चुभने पर उसे पीड़ा होती है और वह अपनी तकलीफ व्यक्त करने के लिए चिल्लाता है, उसी तरह जेन-जी भी अपनी पीड़ा को आंदोलन के जरिए सामने रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की मांगें जायज हैं तो उन्हें तत्काल स्वीकार किया जाना चाहिए।शंकराचार्य ने यह भी कहा कि जेन-जी को लंबे समय तक आंदोलन में जाने से रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। यदि युवाओं की पीड़ा को समय रहते नहीं समझा गया तो यही पीड़ा आगे चलकर बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है। उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व से युवाओं की आवाज को गंभीरता से लेने की अपील की।
छात्र संघ चुनाव बंद होने पर भी उठाए सवाल
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कॉलेज और विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों के निलंबन का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि छात्र संघ चुनाव बंद होने की वजह से नई पीढ़ी को राजनीति में आने और नेतृत्व का अनुभव हासिल करने का अवसर नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी जरूरी है और छात्र राजनीति इसके लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है।
उन्होंने मौजूदा जेन-जी आंदोलन की तुलना जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से भी की। शंकराचार्य ने कहा कि जेपी आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में नए नेता सामने आए थे। उसी तरह जेन-जी के प्रदर्शन से भी नई पीढ़ी के कई नेता उभर सकते हैं।उन्होंने कहा कि अगर युवाओं की आवाज को दबाने या उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने की कोशिश की गई तो आंदोलन से निकलने वाले नए नेतृत्व का प्रभाव तेजी से बढ़ सकता है। शंकराचार्य ने अपने बयान के जरिए सरकार और राजनीतिक दलों से जेन-जी की मांगों को समझने और उनसे संवाद करने का संदेश दिया।