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प्रोबेशन में 100% वेतन के आदेश को SC में चुनौती: सरकार ने कहा- नियम बनाने का अधिकार हमारा; हाईकोर्ट ने पूरा वेतन देने को कहा था

 

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड के दौरान 100 प्रतिशत वेतन देने के हाईकोर्ट के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राज्य सरकार ने अपनी याचिका में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। सरकार का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति और उनकी सेवा शर्तों से जुड़े नियम बनाने का अधिकार राज्य सरकार के पास है।

मामला सीधी भर्ती से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड में मिलने वाले वेतन से जुड़ा है। राज्य में लागू व्यवस्था के तहत प्रोबेशन के पहले वर्ष में 70 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 80 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में 90 प्रतिशत वेतन दिए जाने का प्रावधान था। हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को निरस्त करते हुए कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से 100 प्रतिशत वेतन देने का आदेश दिया था।

8 सितंबर को हाईकोर्ट ने दिया था आदेश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 8 सितंबर 2026 को मामले में आदेश देते हुए 70-80-90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था को रद्द कर दिया। कोर्ट ने संबंधित कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से पूरा वेतन देने का निर्देश दिया। इससे प्रोबेशन अवधि के दौरान कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के बकाया भुगतान का रास्ता भी खुल गया।

इससे पहले भी हाईकोर्ट में कर्मचारियों की ओर से इस व्यवस्था को चुनौती दी गई थी। अदालत ने जनवरी 2026 में भी कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि का पूरा वेतन देने और बकाया राशि के भुगतान का आदेश दिया था।

सरकार ने अनुच्छेद 309 का दिया हवाला

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में संविधान के अनुच्छेद 309 का हवाला दिया है। सरकार का तर्क है कि राज्य को सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों को लेकर नियम बनाने का अधिकार प्राप्त है। सरकार के अनुसार 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन की व्यवस्था मनमाने तरीके से लागू नहीं की गई थी, बल्कि संबंधित विभागों में प्रक्रिया और विचार-विमर्श के बाद इसे लागू किया गया था।

सरकार ने यह भी कहा है कि प्रोबेशन की अवधि कर्मचारी के प्रशिक्षण और कार्यक्षमता के आकलन से जुड़ी होती है। इसी आधार पर चरणबद्ध वेतन भुगतान की व्यवस्था की गई थी।

सरकार ने आर्थिक बोझ का भी जिक्र किया

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी दलील में वित्तीय प्रभाव का भी उल्लेख किया है। सरकार के मुताबिक यदि 2019 से अब तक प्रोबेशन पर रहे कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन के हिसाब से बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान करना पड़ा, तो राज्य के खजाने पर बड़ा अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।

याचिका में पुलिस, पटवारी और शिक्षक समेत बड़ी संख्या में हुई भर्तियों का उल्लेख किया गया है। सरकार का कहना है कि पुराने कर्मचारियों के एरियर और भविष्य की भर्तियों में बढ़ने वाले वेतन खर्च का असर बजट प्रबंधन पर पड़ सकता है।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के 100 प्रतिशत वेतन देने के आदेश पर क्या रुख अपनाया जाता है। फिलहाल राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देकर उस पर रोक लगाने की मांग की है।