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आरएसएस की तीन साल की कार्ययोजना पर मंथन, ‘पंच परिवर्तन’ पर रहेगा फोकस; वीडियो में जाने युवाओं में नशे की लत पर जताई चिंता

 

मध्य प्रदेश के इंदौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक चल रही है। मंगलवार को बैठक का दूसरा दिन है। इसमें संगठन के अगले तीन साल की कार्ययोजना को लेकर चर्चा की जा रही है। संघ ने इस दौरान सामाजिक समरसता, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली, कुटुंब प्रबोधन, स्व का भाव और नागरिक कर्तव्य जैसे पांच विषयों पर विशेष ध्यान देने का फैसला किया है। इन पांच विषयों को संघ ने ‘पंच परिवर्तन’ नाम दिया है।

डेली कॉलेज स्थित संत श्री रविदासजी महाराज सभागार में आयोजित इस बैठक में देशभर से करीब 400 प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस बार बैठक में पहली बार सभी प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारियों को भी बुलाया गया है। संगठनात्मक स्तर पर इस बदलाव की तैयारी पिछले करीब 18 महीने से चल रही थी।

‘पंच परिवर्तन’ के जरिए समाज में बदलाव पर जोर

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बैठक में संघ की आगामी तीन वर्षों की गतिविधियों और सामाजिक कार्यों की रूपरेखा पर विचार किया जा रहा है। पंच परिवर्तन के तहत पांच प्रमुख विषयों को लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की योजना है।

  • सामाजिक समरसता: समाज में आपसी सद्भाव और समानता को बढ़ावा देना।

  • पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली: पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना।

  • कुटुंब प्रबोधन: परिवार व्यवस्था और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने पर जोर देना।

  • स्व का भाव: अपनी संस्कृति, परंपरा और स्वदेशी दृष्टिकोण के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

  • नागरिक कर्तव्य: नागरिकों में देश और समाज के प्रति जिम्मेदारियों का बोध कराना।

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा

सोमवार को शुरू हुई यह तीन दिवसीय बैठक संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसमें शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित गतिविधियों की समीक्षा की जा रही है। साथ ही आगे के कार्यक्रमों और संगठन की प्राथमिकताओं पर चर्चा हो रही है।बैठक में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के विषय पर भी विचार किया गया शहरों, गांवों और कॉलेज परिसरों में युवाओं को संघ से जोड़ने के लिए आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। प्रतिनिधियों ने इन कार्यक्रमों के अनुभवों और उनके प्रभाव पर भी चर्चा की।

युवाओं में नशे के बढ़ते चलन पर चिंता

बैठक के दौरान युवाओं में नशीली दवाओं के बढ़ते चलन को लेकर चिंता जताई गई। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर प्रयास करना जरूरी है।उन्होंने बताया कि नशे की समस्या से युवाओं को बचाने के लिए सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने पर विचार किया जा रहा है। इस दिशा में परिवारों, शिक्षण संस्थानों और सामाजिक संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया।

सभी प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारी पहली बार शामिल

इस बार की बैठक में सभी प्रांतों के प्रमुख पदाधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। संगठन में इस बदलाव की तैयारी करीब डेढ़ साल से चल रही थी। करीब 400 प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हो रही चर्चा में संगठन के विस्तार, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी तथा सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने जैसे विषय शामिल हैं।तीन दिवसीय बैठक में तय होने वाली प्राथमिकताओं के आधार पर संघ अगले तीन वर्षों के लिए अपनी गतिविधियों की दिशा और कार्ययोजना तैयार करेगा।