खेलों पर 5 साल में 1,965 करोड़ रुपए खर्च होंगे: 52 सेंटर से खोजी जाएगी प्रतिभा, मेडल वाले खेलों पर रहेगा फोकस; बनेंगे 140 नए स्टेडियम
देश में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा प्लान तैयार किया है। अगले पांच वर्षों में खेल क्षेत्र के विकास पर 1,965 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इस योजना के तहत खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण सुविधाओं में सुधार और खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
योजना के तहत देशभर में 52 सेंटरों के माध्यम से नई खेल प्रतिभाओं की तलाश की जाएगी। इन केंद्रों पर युवाओं की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही 140 नए स्टेडियम बनाने की योजना भी तैयार की गई है, जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए आधुनिक सुविधाएं मिल सकें।
मेडल वाले खेलों पर रहेगा विशेष फोकस
खेल मंत्रालय की योजना में उन खेलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें भारत के पदक जीतने की संभावना अधिक है। खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कराने के लिए आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ कोच और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
ओलंपिक और अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। इसी को आगे बढ़ाते हुए सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक खिलाड़ियों को तैयार करना है, ताकि वे विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकें।
52 सेंटर में होगी प्रतिभाओं की पहचान
नई योजना के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में बनाए जाने वाले सेंटरों में युवाओं की खेल क्षमता का आकलन किया जाएगा। यहां खिलाड़ियों की फिटनेस, तकनीक और प्रदर्शन के आधार पर चयन किया जाएगा।
चयनित खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण, खेल उपकरण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर दिए जाएंगे। इससे ग्रामीण और छोटे शहरों की छिपी हुई प्रतिभाओं को भी आगे आने का मौका मिलेगा।
140 नए स्टेडियम से मजबूत होगा इंफ्रास्ट्रक्चर
खेलों को बढ़ावा देने के लिए सबसे बड़ी जरूरत बेहतर खेल सुविधाओं की होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए 140 नए स्टेडियम बनाने की योजना बनाई गई है। इन स्टेडियमों में खिलाड़ियों के अभ्यास, प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
नई खेल सुविधाओं के निर्माण से स्थानीय स्तर पर भी खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं को अपने क्षेत्र में ही बेहतर माहौल मिल सकेगा।
खिलाड़ियों को मिलेगा लंबी अवधि का समर्थन
नई योजना का उद्देश्य केवल प्रतिभा खोज तक सीमित नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों को लंबे समय तक तैयार करना भी है। प्रशिक्षण, पोषण, फिटनेस और मानसिक मजबूती जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिभा की पहचान कम उम्र में होने और उसे सही दिशा में प्रशिक्षण मिलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।
भारत को खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में कदम
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई खेलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। अब सरकार की कोशिश है कि खेल सुविधाओं को गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाया जाए। 1,965 करोड़ रुपए की यह योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
52 सेंटरों से प्रतिभा खोज, 140 नए स्टेडियम और पदक वाले खेलों पर फोकस के जरिए भारत आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी स्थिति और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है।