×

60 रुपये की पानी की बोतल पर 175 रुपये वसूले, अब होटल को झटका; उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

 

60 रुपये की एमआरपी वाली पानी की बोतल 175 रुपये में बेचने के मामले में भोपाल के एक बड़े होटल को उपभोक्ता आयोग से झटका लगा है। आयोग ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि होटल और रेस्तरां ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं के आधार पर एमआरपी से अधिक कीमत वसूल सकते हैं, लेकिन उस बढ़ी हुई कीमत पर अलग से जीएसटी लगाना नियमों के अनुरूप नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

मामला एक होटल में ग्राहक को 60 रुपये एमआरपी वाली पानी की बोतल 175 रुपये में बेचने से जुड़ा था। इसके अलावा होटल ने इस राशि पर अलग से जीएसटी भी वसूला था। ग्राहक ने इसे अनुचित बताते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी।

आयोग ने क्या कहा?

उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में माना कि होटल, रेस्तरां और अन्य आतिथ्य संस्थान केवल उत्पाद नहीं बेचते, बल्कि उसके साथ बैठने की व्यवस्था, सेवा, वातानुकूलित माहौल और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में वे एमआरपी से अधिक कीमत लेने के हकदार हो सकते हैं। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया कि जब होटल किसी वस्तु की कीमत स्वयं तय कर रहा है, तो उसी राशि पर अलग से जीएसटी वसूलना उचित नहीं माना जा सकता।

उपभोक्ताओं के लिए अहम फैसला

यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे होटल और रेस्तरां में ग्राहकों से लिए जाने वाले शुल्क और टैक्स को लेकर स्पष्टता मिलेगी।

होटल उद्योग पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर आतिथ्य क्षेत्र के अन्य प्रतिष्ठानों पर भी पड़ सकता है। कई होटल और रेस्तरां अब अपने बिलिंग सिस्टम और टैक्स वसूली की प्रक्रिया की समीक्षा कर सकते हैं।

पारदर्शिता पर जोर

आयोग ने संकेत दिया कि ग्राहकों को बिलिंग में पूरी पारदर्शिता मिलनी चाहिए। किसी भी वस्तु या सेवा की कीमत और उस पर लगाए जाने वाले करों की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ता भ्रमित न हों। यह फैसला होटल और रेस्तरां में होने वाली बिलिंग प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है और भविष्य में ऐसे मामलों के निपटारे में भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है।