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पीएमसीएच में लावारिस मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी स्वास्थ्यकर्मियों पर, अलग वार्ड की कमी के बाद बदली व्यवस्था

 

पटना के पीएमसीएच में अब लावारिस और बेसहारा मरीजों के इलाज को लेकर व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अस्पताल में लावारिस मरीजों के लिए अलग वार्ड की कमी को लेकर लगातार खबरें सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। अब ऐसे मरीजों की देखभाल और इलाज की जिम्मेदारी स्वास्थ्यकर्मी भी उठा रहे हैं। मरीजों को अकेला छोड़ने के बजाय अस्पताल के संबंधित विभाग में भर्ती कर उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

अलग वार्ड नहीं होने से आती थी परेशानी

पीएमसीएच जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें कुछ ऐसे मरीज भी होते हैं, जिनके साथ कोई परिजन नहीं होता। कई बार मरीजों की पहचान भी तत्काल नहीं हो पाती। ऐसे मरीजों को लावारिस या बेसहारा श्रेणी में रखा जाता है।

अलग लावारिस वार्ड की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण ऐसे मरीजों की देखभाल को लेकर परेशानी सामने आती थी। इलाज के साथ-साथ भोजन, दवा और अन्य जरूरी जरूरतों की जिम्मेदारी भी चुनौती बन जाती थी। लगातार इस समस्या को लेकर खबरें प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था में बदलाव की दिशा में कदम उठाया।

स्वास्थ्यकर्मी निभा रहे जिम्मेदारी

नई व्यवस्था के तहत अस्पताल में आने वाले लावारिस मरीजों को संबंधित चिकित्सा विभाग में भर्ती कर इलाज दिया जा रहा है। डॉक्टर मरीज की चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार उपचार कर रहे हैं, जबकि स्वास्थ्यकर्मी उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का ध्यान रखने में सहयोग कर रहे हैं।

मरीज को दवा देने, समय पर भोजन उपलब्ध कराने और जरूरी जांच कराने जैसी प्रक्रियाओं में भी अस्पताल के कर्मचारी भूमिका निभा रहे हैं। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को जरूरत के अनुसार संबंधित विभाग में उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

पहचान और परिजनों की तलाश पर भी जोर

लावारिस मरीजों के मामले में इलाज के साथ उनकी पहचान और परिजनों की तलाश भी महत्वपूर्ण होती है। अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीज के बारे में उपलब्ध जानकारी जुटाने का प्रयास किया जाता है। पहचान मिलने पर परिजनों से संपर्क कर उन्हें अस्पताल बुलाने की कोशिश की जाती है।

कई मामलों में मरीज अपनी स्थिति के कारण परिवार या घर का पता बताने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में अस्पताल प्रशासन और संबंधित कर्मियों के सामने मरीज की देखभाल के साथ उसके परिजनों तक पहुंचने की चुनौती रहती है।

मानवीय पहल के तौर पर देखा जा रहा कदम

पीएमसीएच में बदली गई यह व्यवस्था लावारिस मरीजों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अस्पताल में इलाज कराने आने वाला कोई भी मरीज सिर्फ इसलिए उपेक्षित न रहे कि उसके साथ कोई परिजन मौजूद नहीं है, इस दिशा में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अहम हो गई है।

अस्पताल प्रशासन का प्रयास है कि लावारिस मरीजों को भी अन्य मरीजों की तरह चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। अलग वार्ड की कमी के बीच संबंधित विभागों में भर्ती कर इलाज और देखभाल की व्यवस्था फिलहाल एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में अपनाई गई है। इससे बेसहारा मरीजों को समय पर उपचार मिलने के साथ उनकी बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा जा सकेगा।