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बार-बार हटाने की कोशिश हुई नाकाम, इसलिए पड़ा ‘हठीले हनुमान’ नाम; बागपत के इस मंदिर की अनोखी मान्यता

 

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में भगवान हनुमान का एक ऐसा मंदिर है, जो अपनी अनोखी मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है। यहां विराजमान हनुमान जी को ‘हठीले हनुमान’ के नाम से जाना जाता है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यता के अनुसार, कई बार हनुमान जी की मूर्ति को वहां से हटाने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार प्रयास सफल नहीं हो सका। इसके बाद भक्तों ने हनुमान जी को ‘हठीले हनुमान’ नाम दे दिया।

बताया जाता है कि मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा काफी समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर और प्रतिमा को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने और अपनी मनोकामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को हनुमान जी का आशीर्वाद मिलता है।

मूर्ति हटाने की कोशिशों से जुड़ी है मान्यता

मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार, अलग-अलग समय पर हनुमान जी की प्रतिमा को वहां से हटाने का प्रयास किया गया। हालांकि, स्थानीय मान्यता के मुताबिक हर कोशिश असफल रही। प्रतिमा को हटाने में सफलता नहीं मिलने के बाद लोगों ने इसे हनुमान जी की इच्छा माना।

इसी मान्यता के चलते भक्तों ने बजरंगबली को ‘हठीले हनुमान’ कहना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे यह नाम लोगों के बीच प्रसिद्ध हो गया और मंदिर की पहचान भी इसी नाम से जुड़ गई।

श्रद्धालुओं में खास आस्था

हनुमान जी को हिंदू धर्म में शक्ति, साहस, भक्ति और संकटों से रक्षा करने वाला देवता माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को विशेष रूप से बड़ी संख्या में भक्त हनुमान मंदिरों में पूजा करने पहुंचते हैं। बागपत के इस मंदिर में भी श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

भक्त यहां हनुमान जी के सामने अपनी मनोकामनाएं रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। मंदिर से जुड़ी स्थानीय कहानियां और मान्यताएं श्रद्धालुओं की आस्था को और मजबूत करती हैं।

‘हठीले हनुमान’ नाम बना पहचान

इस मंदिर की सबसे खास बात यही है कि यहां विराजमान हनुमान जी को उनके पारंपरिक नामों के साथ ‘हठीले हनुमान’ के नाम से भी जाना जाता है। प्रतिमा को हटाने की कथित असफल कोशिशों से जुड़ी कहानी ने इस मंदिर को स्थानीय स्तर पर अलग पहचान दी है।

हालांकि, मूर्ति हटाने से जुड़ी घटनाओं और धार्मिक मान्यताओं की स्वतंत्र ऐतिहासिक पुष्टि अलग विषय है। यह कहानी मुख्य रूप से स्थानीय आस्था और मंदिर से जुड़ी प्रचलित मान्यता के रूप में बताई जाती है। यही वजह है कि बागपत आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय लोकविश्वास का भी खास उदाहरण माना जाता है।