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सरकारी तिजोरी से असली सोना गायब, नकली जेवर रखे गए! हाईकोर्ट सख्त, सीआईडी जांच पर उठाए सवाल

 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकारी कस्टडी (तिजोरी) से असली सोने के आभूषण गायब कर उनकी जगह नकली जेवर रखे जाने के दशकों पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जी.एस. सिंह अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के संकेत दिए हैं।

मामला सरकारी तिजोरी में सुरक्षित रखे गए जब्त सोने के आभूषणों से जुड़ा है। आरोप है कि वर्षों पहले सरकारी अभिरक्षा में रखे गए असली सोने के जेवर गायब कर दिए गए और उनकी जगह नकली आभूषण रख दिए गए। इस गंभीर अनियमितता के बावजूद लंबे समय तक मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका, जिससे जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीआईडी की जांच पर भी सख्त टिप्पणी की और जांच की गुणवत्ता तथा निष्कर्षों को लेकर सवाल उठाए। अदालत ने संकेत दिए कि सरकारी अभिरक्षा में रखे गए कीमती सामान की सुरक्षा से जुड़ा यह मामला बेहद गंभीर है और इसकी गहराई से जांच होना आवश्यक है।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि यदि सरकारी कस्टडी में रखी गई संपत्ति सुरक्षित नहीं रह सकती, तो यह पूरे तंत्र की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। अदालत ने जांच एजेंसियों से जवाबदेही तय करने और दोषियों तक पहुंचने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकारी तिजोरी में रखे गए जब्त आभूषण अदालतों में लंबित मामलों के महत्वपूर्ण साक्ष्य भी हो सकते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में सरकारी कर्मचारियों या अधिकारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किए जा सकते हैं। वहीं, इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकारी मालखानों और तिजोरियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी है।

फिलहाल हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच एजेंसियां अदालत के निर्देशों के अनुरूप क्या कदम उठाती हैं और दशकों पुराने इस मामले में जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही कब तय होती है।