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रावण कहीं दामाद, कहीं देवता; दशहरे पर बदल जाती हैं परंपराएं, रीवा में राम राजाधिराज तो भाटखेड़ी में रावण-कुंभकर्ण की पूजा

 

मध्य प्रदेश में दशहरा केवल रावण दहन और बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व नहीं है, बल्कि कई जगहों पर इससे जुड़ी अनूठी परंपराएं भी देखने को मिलती हैं। कहीं भगवान श्रीराम को राजाधिराज के रूप में पूजा जाता है, तो कहीं रावण और कुंभकर्ण की आराधना की जाती है। कुछ स्थानों पर रावण को दामाद का दर्जा भी दिया जाता है। वहीं, मनावर में राम और रावण की सेनाओं के बीच हास्य युद्ध की परंपरा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनती है।

इन अलग-अलग परंपराओं से पता चलता है कि दशहरा देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत के अनुसार मनाया जाता है।

रीवा में भगवान श्रीराम हैं राजाधिराज

रीवा में दशहरे से जुड़ी धार्मिक परंपराओं में भगवान श्रीराम की आराधना का विशेष महत्व है। यहां श्रीराम को राजाधिराज के रूप में सम्मान देने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। दशहरे के अवसर पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम की विजय और धर्म की स्थापना के प्रसंग को याद करते हैं।

रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। इसी घटना को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। रीवा में भगवान श्रीराम को राजाधिराज मानने की परंपरा इस धार्मिक आस्था को विशेष पहचान देती है।

भाटखेड़ी में रावण-कुंभकर्ण की पूजा

जहां देश के अधिकतर हिस्सों में दशहरे पर रावण का पुतला जलाया जाता है, वहीं मध्य प्रदेश के भाटखेड़ी में रावण और कुंभकर्ण की पूजा किए जाने की परंपरा चर्चा में रहती है। यहां स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन पात्रों को धार्मिक-सांस्कृतिक नजरिए से देखा जाता है।

रावण को रामायण में विद्वान, शिवभक्त और लंका का राजा बताया गया है। हालांकि, उसका अहंकार और माता सीता का हरण उसके पतन का कारण बना। अलग-अलग क्षेत्रों में रावण को लेकर प्रचलित मान्यताएं स्थानीय इतिहास, लोककथाओं और समुदायों की परंपराओं से जुड़ी हुई हैं।

कुछ स्थानों पर रावण को दामाद मानने की परंपरा भी बताई जाती है। ऐसी मान्यताओं के पीछे स्थानीय लोकविश्वास और सामाजिक परंपराएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

मनावर में राम-रावण की सेनाओं का हास्य युद्ध

मनावर में दशहरे के दौरान राम और रावण की सेनाओं के बीच हास्य युद्ध की परंपरा भी खास आकर्षण रहती है। इस आयोजन में युद्ध के प्रसंग को मनोरंजक अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है। इसमें शामिल लोग पारंपरिक भूमिकाएं निभाते हुए माहौल को उत्सवमय बनाते हैं।

हास्य युद्ध के जरिए रामायण के प्रसंगों को स्थानीय रंग में प्रस्तुत किया जाता है। यह आयोजन धार्मिक कथा के साथ लोकसंस्कृति और सामुदायिक भागीदारी को भी सामने लाता है।

एक पर्व, कई परंपराएं

दशहरा सामान्य तौर पर भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अलग-अलग स्थानों पर इससे जुड़ी परंपराएं अलग रूप ले लेती हैं। कहीं रावण दहन होता है, कहीं उसकी पूजा की जाती है और कहीं राम-रावण युद्ध को हास्य और लोकनाट्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

मध्य प्रदेश की ये परंपराएं बताती हैं कि त्योहारों का स्वरूप केवल धार्मिक कथाओं से नहीं, बल्कि स्थानीय इतिहास, मान्यताओं और सांस्कृतिक पहचान से भी बनता है। यही विविधता दशहरे को अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट बनाती है।