हिट एंड रन मामलों में राजस्थान देश में नंबर-1, लेकिन मुआवजा देने में फिसड्डी; आधे पीड़ित परिवारों को भी नहीं मिली सहायता
सड़क हादसों में हिट एंड रन के मामलों में राजस्थान चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह देश में शीर्ष स्थान पर है। लेकिन दूसरी ओर, हादसों में जान गंवाने वाले या गंभीर रूप से घायल लोगों के परिवारों को सरकारी मुआवजा दिलाने के मामले में व्यवस्था बेहद कमजोर साबित हो रही है। स्थिति यह है कि पात्र परिवारों में से 50 प्रतिशत से भी कम लोगों को आर्थिक सहायता मिल पाई है।
हिट एंड रन दुर्घटनाओं में अक्सर वाहन चालक घटना के बाद मौके से फरार हो जाता है, जिससे पीड़ितों को समय पर मदद नहीं मिल पाती। ऐसे मामलों में केंद्र सरकार की योजना के तहत मृतकों के परिजनों और घायलों को आर्थिक सहायता देने का प्रावधान है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रभावित परिवार अब भी मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मुआवजा वितरण में देरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें दस्तावेजों की कमी, आवेदन प्रक्रिया की जटिलता, मामलों के सत्यापन में लंबा समय लगना और विभागों के बीच समन्वय का अभाव प्रमुख हैं। कई परिवारों को यह तक जानकारी नहीं होती कि वे सरकारी सहायता पाने के पात्र हैं।
सड़क सुरक्षा से जुड़े जानकारों का मानना है कि हादसे के बाद पीड़ित परिवार पहले से ही आर्थिक और मानसिक संकट से गुजरता है। ऐसे समय में यदि सरकारी सहायता समय पर नहीं मिले तो उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। इसलिए मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाना आवश्यक है।
विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि पुलिस, परिवहन विभाग और जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। हादसे का मामला दर्ज होते ही पात्रता की जांच शुरू हो और पीड़ित परिवारों से अलग से आवेदन कराने के बजाय प्रशासन स्वत: प्रक्रिया आगे बढ़ाए। इससे मुआवजा मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी को कम किया जा सकता है।
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सख्त ट्रैफिक नियमों का पालन, सीसीटीवी निगरानी, तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई तथा लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी माना जा रहा है।
हिट एंड रन मामलों में राजस्थान का शीर्ष पर होना चिंता का विषय है। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि अपनों को खो चुके कई परिवार सरकारी सहायता से भी वंचित हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा के साथ-साथ पीड़ितों को समय पर मुआवजा उपलब्ध कराना भी सरकार और प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।