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MP में बारिश का ब्रेक: 35 जिलों में औसत से कम बारिश, पूर्वी हिस्से में सूखे जैसे हालात

 

मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से कई जिलों में बारिश का संकट गहराने लगा है। पिछले 7 दिनों से प्रदेश में भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई है। इसके चलते राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं।

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 35 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे यानी माइनस में चल रहा है। खासतौर पर पूर्वी मध्य प्रदेश के कई संभागों में बारिश की कमी ज्यादा देखने को मिल रही है।

जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की कमी

प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मानसून कमजोर रहने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के कई जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है।

जबलपुर सहित आसपास के जिलों में बारिश की कमी का असर खेती पर भी पड़ने की आशंका है। किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि खरीफ फसलों की स्थिति बेहतर हो सके।

पश्चिमी हिस्से में भी राहत सीमित

प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में कुछ स्थानों पर बारिश हुई है, लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं मानी जा रही। कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से पीछे चल रहा है।

मानसून के कमजोर पड़ने से जलाशयों, नदी-नालों और भूजल स्तर पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

किसानों की बढ़ी चिंता

बारिश में कमी का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ रहा है। खरीफ सीजन में बोवनी के बाद फसलों को पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। ऐसे में लंबे समय तक बारिश नहीं होने से फसलों पर संकट गहरा सकता है।

किसान अब मानसून की सक्रियता का इंतजार कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर निर्भरता बढ़ने लगी है।

मौसम विभाग की नजर नए सिस्टम पर

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कम होने का कारण मानसूनी सिस्टम का कमजोर होना है। हालांकि, आने वाले दिनों में नए मौसम सिस्टम बनने पर बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल प्रदेश के कई जिलों में बादल तो छाए हुए हैं, लेकिन उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हो रही। अगर जल्द ही मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो प्रदेश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात और गंभीर हो सकते हैं।