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DAVV की पीएचडी परीक्षा पर उठे सवाल: ट्राइबल स्टडी में 43 में से 33 अभ्यर्थी पास, अब बड़ा सवाल—क्या हैं पर्याप्त गाइड और विभागीय संसाधन?

 

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी (DAVV) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला पीएचडी प्रवेश परीक्षा (PET) 2026 से जुड़ा है। विश्वविद्यालय ने पहली बार ट्राइबल स्टडी विषय को पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल किया। सोमवार को जारी परिणाम में 43 अभ्यर्थियों में से 33 उम्मीदवारों के क्वालिफाई होने के बाद अब कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विश्वविद्यालय के पास इतने शोधार्थियों का मार्गदर्शन करने के लिए पर्याप्त गाइड (रिसर्च सुपरवाइजर), विभागीय ढांचा और शोध संसाधन उपलब्ध हैं?

पहली बार शामिल हुआ ट्राइबल स्टडी विषय

इस वर्ष विश्वविद्यालय ने ट्राइबल स्टडी को पीएचडी प्रवेश परीक्षा के नए विषय के रूप में जोड़ा था। परिणाम आने पर करीब 77 प्रतिशत अभ्यर्थियों के सफल होने से शिक्षा जगत में चर्चा तेज हो गई है।

अब बड़ा सवाल...

विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का कहना है कि केवल बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का क्वालिफाई होना ही पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती यह है कि—

  • क्या ट्राइबल स्टडी के लिए पर्याप्त पीएचडी गाइड उपलब्ध हैं?
  • क्या विश्वविद्यालय में इस विषय के लिए अलग विभाग या मजबूत शोध ढांचा मौजूद है?
  • क्या सभी योग्य अभ्यर्थियों को नियमानुसार रिसर्च सुपरवाइजर और शोध सुविधाएं मिल पाएंगी?

यदि संसाधन सीमित हुए, तो कई सफल अभ्यर्थियों को प्रवेश मिलने में कठिनाई हो सकती है।

प्रवेश का मतलब दाखिला नहीं

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पीएचडी प्रवेश परीक्षा में क्वालिफाई करना अंतिम प्रवेश की गारंटी नहीं होता। इसके बाद इंटरव्यू, मेरिट, गाइड की उपलब्धता और सीटों के आधार पर अंतिम चयन किया जाता है।

विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस विषय में कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि DAVV ट्राइबल स्टडी विषय में शोधार्थियों के प्रवेश, गाइड की उपलब्धता और शोध व्यवस्था को लेकर क्या रणनीति अपनाता है।

इस पूरे घटनाक्रम ने विश्वविद्यालय की शोध व्यवस्था और संसाधनों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना होगा कि DAVV इन सवालों का जवाब किस तरह देता है और सफल अभ्यर्थियों को शोध के लिए किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराता है।