DAVV की पीएचडी प्रवेश परीक्षा पर उठे सवाल, ट्राइबल स्टडी विषय में 43 में से 33 अभ्यर्थी क्वालिफाई
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी (DAVV) एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार मामला पीएचडी प्रवेश परीक्षा (PET) से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी ने पहली बार ट्राइबल स्टडी विषय को पीएचडी प्रवेश परीक्षा में शामिल किया, लेकिन सोमवार को घोषित परिणामों ने कई सवाल खड़े कर दिए।
रिजल्ट के अनुसार, ट्राइबल स्टडी विषय में परीक्षा देने वाले 43 अभ्यर्थियों में से 33 उम्मीदवार क्वालिफाई हो गए। यानी करीब 77 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा में सफल रहे, जिसे लेकर शैक्षणिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
पहली बार शामिल किया गया ट्राइबल स्टडी विषय
इस वर्ष यूनिवर्सिटी ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा के लिए ट्राइबल स्टडी को नए विषय के रूप में शामिल किया था। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने इस विषय में आवेदन किया और परीक्षा दी।
रिजल्ट ने बढ़ाई चर्चा
सोमवार को परिणाम जारी होने के बाद सामने आया कि 43 में से 33 अभ्यर्थियों ने क्वालिफाई किया है। इतने अधिक सफलता प्रतिशत को लेकर विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रक्रिया और मूल्यांकन को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विशेषज्ञों की नजर प्रक्रिया पर
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि किसी भी नए विषय में अधिक संख्या में अभ्यर्थियों का सफल होना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन यदि इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं तो विश्वविद्यालय को पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।
विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस परिणाम को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि किसी अभ्यर्थी या पक्ष की ओर से परीक्षा प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार उसका परीक्षण कर सकता है।
पारदर्शिता पर रहेगा फोकस
पीएचडी प्रवेश परीक्षा उच्च शिक्षा और शोध से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि परिणामों को लेकर उठने वाले किसी भी सवाल का तथ्यात्मक और पारदर्शी तरीके से जवाब दिया जाना आवश्यक है, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वविद्यालय की चयन प्रक्रिया पर विश्वास बना रहे।