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मध्य प्रदेश के 55 पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस पर उठे सवाल, NEP-2020 के दावों और जमीनी हकीकत में अंतर

 

मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश के 55 जिलों में संचालित इन कॉलेजों को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव का माध्यम बताया गया था, लेकिन आरोप है कि कई संस्थानों में व्यवस्था अपेक्षित रूप से विकसित नहीं हो सकी है।

बताया जा रहा है कि पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के नाम पर पुराने सरकारी कॉलेजों को ही नए स्वरूप में संचालित किया जा रहा है। आलोचना यह है कि संस्थानों के नाम और पहचान में बदलाव तो किया गया, लेकिन उन्हें लंबे समय तक प्रभावी ढंग से चलाने के लिए स्थायी प्रशासनिक और शैक्षणिक तंत्र विकसित नहीं किया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य उच्च शिक्षा को अधिक रोजगारपरक, बहुविषयक और गुणवत्तापूर्ण बनाना है। इसके तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ कौशल विकास, तकनीकी ज्ञान और नए विषयों के अध्ययन के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। ऐसे में पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा गया था।

हालांकि, इन कॉलेजों को लेकर सामने आ रही आपत्तियों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुराने संस्थानों को केवल नया नाम देने से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक बदलाव आएगा। कॉलेजों में स्थायी संसाधन, पर्याप्त शिक्षकीय व्यवस्था, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, तकनीकी सुविधाएं और अन्य शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रदेश के 55 जिलों में इन कॉलेजों के संचालन का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके ही क्षेत्र में बेहतर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं और पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध नहीं होते हैं, तो योजना के अपेक्षित परिणाम हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार की ओर से पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस को लेकर किए गए दावों और कॉलेजों की वास्तविक स्थिति के बीच कितना अंतर है। इसके लिए प्रत्येक संस्थान में उपलब्ध संसाधनों, शिक्षकों की स्थिति, विद्यार्थियों को मिल रही सुविधाओं और नए पाठ्यक्रमों के संचालन की स्थिति का मूल्यांकन जरूरी है।

फिलहाल पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस को लेकर उठ रहे सवाल मध्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में योजनाओं के क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव को लेकर बहस को तेज कर सकते हैं। आगामी समय में इन संस्थानों की व्यवस्थाओं और उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा से यह स्पष्ट हो सकेगा कि NEP-2020 के तहत शुरू की गई यह पहल वास्तव में विद्यार्थियों के लिए कितना बदलाव ला पाई है