PWD में किराये की टैक्सी के ईंधन खर्च पर सवाल: RTI में चौंकाने वाला खुलासा, 50 लीटर टैंक में 55 लीटर तक डीजल भराने का दावा
मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में किराए की टैक्सी गाड़ियों के उपयोग और ईंधन खर्च को लेकर सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिए कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, 50 लीटर क्षमता वाले वाहनों में 52 से 55 लीटर तक ईंधन भराने के रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आरटीआई से मिले दस्तावेज बताते हैं कि कई वाहनों के ईंधन बिलों में वाहन की वास्तविक टैंक क्षमता से अधिक डीजल या पेट्रोल भराए जाने का उल्लेख है। तकनीकी रूप से किसी वाहन की निर्धारित क्षमता से अधिक ईंधन भरना संभव नहीं माना जाता, ऐसे में इन रिकॉर्ड्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
रिकॉर्ड में सामने आईं अनियमितताएं
दस्तावेजों के अनुसार, कुछ किराए की टैक्सी गाड़ियों में उनकी निर्धारित क्षमता से 2 से 5 लीटर अधिक ईंधन भराने के बिल दर्ज किए गए हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि ईंधन व्यय के रिकॉर्ड में गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता हो सकती है।
विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद पीडब्ल्यूडी में किराये के वाहनों के संचालन, ईंधन भुगतान और बिलों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दस्तावेज सही हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
जांच की मांग तेज
आरटीआई से हुए खुलासे के बाद मामले की जांच की मांग उठने लगी है। जानकारों का मानना है कि ईंधन संबंधी रिकॉर्ड, भुगतान प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल इस मामले में संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।