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केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के विरोध में राहुल गांधी से मिले आंदोलनकारी, वीडियो में देंखे आदिवासी परिवारों के विस्थापन का मुद्दा उठाया

 

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के खिलाफ चल रहे आंदोलन को अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी का समर्थन मिला है। आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता अमित भटनागर ने राहुल गांधी से मुलाकात कर परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को विस्तार से उनके सामने रखा। इस दौरान विस्थापन, पुनर्वास और प्रभावित परिवारों को मिलने वाले अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।

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आंदोलनकारियों ने राहुल गांधी को बताया कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड के कई परिवार प्रभावित हो रहे हैं। खासतौर पर आदिवासी समुदाय के लोगों को विस्थापन की चिंता सता रही है। प्रभावित परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों और न्याय की मांग को लेकर सत्याग्रह कर रहे हैं। आंदोलनकारियों ने कहा कि उनकी मांग केवल जमीन और मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने घर, आजीविका, सामाजिक अधिकार और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग भी कर रहे हैं।

अमित भटनागर ने मुलाकात के दौरान आंदोलन से जुड़ी अब तक की परिस्थितियों की जानकारी राहुल गांधी को दी। उन्होंने बताया कि सत्याग्रह के दौरान प्रभावित परिवारों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने राहुल को अपनी प्रमुख मांगों और प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले परिवारों की स्थिति से भी अवगत कराया।

राहुल गांधी ने बुधवार को इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलनकारियों के संघर्ष का समर्थन करते हुए अपनी बात रखी। राहुल गांधी ने कहा कि अपने जायज हक की लड़ाई लड़ रहे बुंदेलखंड के निवासी सम्मान और समर्थन के हकदार हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आदिवासी परिवारों की इस लड़ाई में वे और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं।राहुल गांधी ने आंदोलनकारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके मुद्दों को आगे उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों की आवाज को मजबूती से सामने लाने की जरूरत है। मुलाकात के बाद आंदोलनकारियों में भी उम्मीद जगी है कि उनकी मांगों को अब राजनीतिक स्तर पर और मजबूती से उठाया जाएगा।

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य केन नदी के पानी को बेतवा नदी तक पहुंचाकर बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को कम करना और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। हालांकि, परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से विरोध भी सामने आता रहा है।आंदोलनकारियों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी और ग्रामीण परिवारों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि परियोजना के कारण उन्हें अपने घर और जमीन छोड़नी पड़ती है, तो उन्हें उचित मुआवजा, पुनर्वास और आजीविका की गारंटी मिलनी चाहिए।

राहुल गांधी के समर्थन के बाद छतरपुर में चल रहे इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा तेज हो गई है। अब आंदोलनकारियों की नजर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर है। प्रभावित परिवार उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और विस्थापन व पुनर्वास से जुड़े मुद्दों का न्यायपूर्ण समाधान निकलेगा।