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वाराणसी में इमाम हसन की शहादत पर निकला जुलूस, अलम, ताबूत और दुलदुल के साथ देर रात दरगाह फातमान पहुंचा

 

इमाम हुसैन के बड़े भाई इमाम हसन की शहादत की याद में वाराणसी में मातमी जुलूस निकाला गया। नई सड़क स्थित शेख सलीम फाटक के रिजवी हाउस से अलम, ताबूत और दुलदुल के साथ जुलूस रवाना हुआ। जुलूस अपने पारंपरिक यानी कदीमी रास्तों से गुजरता हुआ देर रात करीब 3 बजे दरगाह फातमान पहुंचकर समाप्त हुआ।

जुलूस के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। लोगों ने इमाम हसन की शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और धार्मिक रस्में पूरी कीं।

रिजवी हाउस से शुरू हुआ जुलूस

इमाम हसन की शहादत की याद में आयोजित जुलूस की शुरुआत नई सड़क के शेख सलीम फाटक स्थित रिजवी हाउस से हुई। यहां से अलम, ताबूत और दुलदुल को जुलूस में शामिल किया गया।

जुलूस के साथ बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। धार्मिक परंपराओं के अनुसार कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया और अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा के साथ इसमें हिस्सा लिया।

कदीमी रास्तों से गुजरा जुलूस

जुलूस वाराणसी के पारंपरिक मार्गों से होकर आगे बढ़ा। रास्ते में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन की ओर से भी इंतजाम किए गए।

जुलूस के दौरान अकीदतमंदों ने इमाम हसन की शहादत को याद किया और धार्मिक रस्मों में हिस्सा लिया।

रात 3 बजे दरगाह फातमान में हुआ समापन

कई घंटे तक चलने के बाद जुलूस रात करीब 3 बजे दरगाह फातमान पहुंचा। यहां धार्मिक कार्यक्रम और रस्मों के साथ जुलूस का समापन किया गया।

इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक और भावनात्मक माहौल बना रहा।

पुरानी परंपरा के अनुसार आयोजन

वाराणसी में विभिन्न धार्मिक अवसरों पर पारंपरिक जुलूस और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इमाम हसन की शहादत की याद में निकाला गया यह जुलूस भी पुरानी धार्मिक परंपरा के तहत आयोजित किया गया।

आयोजकों और अकीदतमंदों ने कार्यक्रम को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया।

इमाम हसन की शहादत की याद में निकला यह जुलूस नई सड़क के रिजवी हाउस से शुरू होकर कदीमी रास्तों से गुजरते हुए रात करीब 3 बजे दरगाह फातमान पहुंचा, जहां धार्मिक रस्मों के साथ इसका समापन हुआ।