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महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी तेज? परिसीमन कानून को लेकर बढ़ी राजनीतिक चर्चाएं

 

संसद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बढ़ती संख्या और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि वर्ष 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए सरकार जल्द परिसीमन (Delimitation) कानून संसद में ला सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया परिसीमन और जनगणना से जुड़ी हुई है। ऐसे में यदि सरकार 2029 तक महिला आरक्षण को प्रभावी बनाना चाहती है, तो परिसीमन से संबंधित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा करना होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में संसद में एनडीए की संख्या मजबूत होने के संकेत मिले हैं। इससे सरकार के लिए बड़े विधायी फैसले लेना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। इसी वजह से परिसीमन कानून को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक परिसीमन कानून को संसद में लाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक चर्चाओं और संभावनाओं के रूप में ही देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि Women's Reservation Act 2023 के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। लेकिन इसके लागू होने की प्रक्रिया आगामी जनगणना और परिसीमन की कवायद पूरी होने के बाद ही संभव मानी जाती है।

विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए सरकार को स्पष्ट रोडमैप पेश करना चाहिए। वहीं सत्तापक्ष का दावा है कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में ऐतिहासिक कदम पहले ही उठाया जा चुका है और आवश्यक प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी की जाएंगी।

फिलहाल, संसद में बदलते राजनीतिक समीकरणों और एनडीए की बढ़ती ताकत के बीच परिसीमन कानून को लेकर अटकलें तेज हैं। यदि सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो इसका असर देश की चुनावी और राजनीतिक संरचना पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।