भोपाल के बड़े-छोटे तालाब में अब भी पहुंच रहा गंदा पानी, सीवेज नेटवर्क पर 145 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं सुधरे हालात
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भोज वेटलैंड प्रोजेक्ट के तहत बड़े और छोटे तालाब को प्रदूषण से बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद गंदे पानी की समस्या खत्म नहीं हुई। सीवेज नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए प्रोजेक्ट अमृत-1 के तहत 145 करोड़ रुपये खर्च किए गए। पुराने पंप हाउसों की मशीनें बदली गईं, नए पंप हाउस बनाए गए और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार किए गए। इसके बावजूद तालाबों में गंदा पानी पहुंचना बंद नहीं हुआ है।
इस स्थिति ने सीवेज प्रबंधन और परियोजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से व्यवस्था को बेहतर बनाया गया था, वह अब तक पूरी तरह हासिल होता नजर नहीं आ रहा है।
145 करोड़ रुपये से किया गया सीवेज नेटवर्क का अपग्रेडेशन
भोज वेटलैंड प्रोजेक्ट के तहत तालाबों में गंदे पानी की आवक रोकने के लिए सीवेज नेटवर्क को मजबूत करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए प्रोजेक्ट अमृत-1 में 145 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
परियोजना के तहत पुराने पंप हाउसों में लगी मशीनों को बदला गया। इसके अलावा नए पंप हाउस बनाए गए, ताकि सीवेज को व्यवस्थित तरीके से ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जा सके। सीवेज के शोधन के लिए नए ट्रीटमेंट प्लांट भी तैयार किए गए।
इन कार्यों का मकसद शहर के गंदे पानी को बिना शोधन के तालाबों तक पहुंचने से रोकना था। लेकिन इतने बड़े निवेश के बावजूद समस्या बनी हुई है।
बड़े और छोटे तालाब में पहुंच रहा गंदा पानी
भोपाल के बड़े और छोटे तालाब शहर की जल व्यवस्था और पर्यावरण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इन जलस्रोतों में गंदा पानी पहुंचने से प्रदूषण का खतरा बना रहता है। सीवेज नेटवर्क के अपग्रेडेशन के बाद भी गंदे पानी की आवक जारी रहने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर व्यवस्था में कमी कहां रह गई।
पंप हाउस और ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जाने के बावजूद यदि गंदा पानी तालाबों तक पहुंच रहा है, तो सीवेज के संग्रह, परिवहन और शोधन की पूरी व्यवस्था की जांच जरूरी हो जाती है।
करोड़ों खर्च के बाद भी समाधान क्यों नहीं?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल परियोजना की प्रभावशीलता को लेकर है। क्या सभी इलाकों का सीवेज नेटवर्क पूरी तरह जुड़ पाया है? क्या पंप हाउस और ट्रीटमेंट प्लांट निर्धारित क्षमता के अनुसार काम कर रहे हैं? और क्या गंदे पानी को तालाबों तक पहुंचने से रोकने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है, ताकि समस्या की वास्तविक वजह का पता चल सके। केवल निर्माण कार्यों पर खर्च करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तैयार सुविधाओं का नियमित संचालन और रखरखाव भी जरूरी है।
भोज वेटलैंड के बड़े और छोटे तालाब को प्रदूषण से बचाने के लिए अब तक किए गए खर्च के बावजूद समस्या बरकरार है। ऐसे में संबंधित विभागों के सामने सीवेज नेटवर्क की खामियां दूर करने और तालाबों में गंदे पानी की आवक रोकने की चुनौती बनी हुई है।