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20 करोड़ के पोषण आहार की पोल: आंगनवाड़ियों में मक्खियों वाली पूड़ियां, गंदे किचन और 'दाल' के नाम पर पीला पानी, भास्कर की पड़ताल में खुलासा

 

बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों में पोषण आहार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दैनिक भास्कर की इंदौर जिले की 35 आंगनवाड़ियों में की गई पड़ताल में करोड़ों रुपये की पोषण योजना में भारी लापरवाही और निगरानी व्यवस्था की बड़ी खामियां सामने आई हैं।

पड़ताल के दौरान कई केंद्रों पर मक्खियों से भरी पूड़ियां, महीनों से साफ नहीं हुए रसोईघर, कच्ची और जली हुई रोटियां, दाल के नाम पर पतला पीला पानी और सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए परोसी गई दूध की खीर जैसी स्थिति देखने को मिली।

किचन की बदहाल हालत

जांच में कई आंगनवाड़ियों के रसोईघर बेहद गंदे पाए गए। रसोई में साफ-सफाई का अभाव, खुले में रखा खाद्य सामग्री और स्वच्छता के मानकों की अनदेखी स्पष्ट दिखाई दी। कई स्थानों पर किचन लंबे समय से साफ नहीं किए जाने के संकेत मिले।

भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

पड़ताल में सामने आया कि बच्चों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब थी। कहीं अधपकी और जली रोटियां परोसी जा रही थीं तो कहीं दाल इतनी पतली थी कि वह केवल पीले रंग का पानी नजर आ रही थी। कुछ केंद्रों पर पूड़ियों पर मक्खियां बैठी मिलीं, जिससे खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर सवाल खड़े हो गए।

20 करोड़ की योजना पर सवाल

इंदौर जिले में पोषण आहार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्था अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतर रही। इससे योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और धन के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

निगरानी व्यवस्था की खुली पोल

पड़ताल ने संबंधित विभाग की निरीक्षण और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। यदि नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता जांच प्रभावी ढंग से होती, तो इस तरह की खामियां लंबे समय तक जारी नहीं रहतीं।

कार्रवाई की मांग

मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, भोजन की गुणवत्ता में सुधार और नियमित निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आंगनवाड़ी केंद्रों में मिलने वाला पोषण आहार बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।

अब सभी की नजर महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्रवाई पर है कि जांच के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं और पोषण आहार की गुणवत्ता सुधारने के लिए कौन से ठोस उपाय किए जाते हैं।