PM की अपील का असर, NH पर निजी वाहनों की आवाजाही 6.7% घटी; 13 जिलों के 29 टोल प्लाजा पर स्टडी
राष्ट्रीय राजमार्गों पर निजी वाहनों की आवाजाही में कमी दर्ज की गई है। एक अध्ययन के मुताबिक, 13 जिलों में हाईवे के 29 टोल प्लाजा से गुजरने वाले निजी वाहनों की संख्या में करीब 6.7 फीसदी की गिरावट आई है। इसे प्रधानमंत्री की ओर से की गई यात्रा कम करने की अपील के असर से जोड़कर देखा जा रहा है।
अध्ययन में अलग-अलग टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें निजी वाहनों की आवाजाही में आई कमी को प्रमुखता से दर्ज किया गया है। हालांकि, इस बदलाव के पीछे केवल एक कारण को जिम्मेदार मानने के बजाय अन्य स्थानीय और मौसमी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
13 जिलों के 29 टोल प्लाजा का डेटा
अध्ययन के लिए 13 जिलों में स्थित राष्ट्रीय राजमार्गों के 29 टोल प्लाजा से गुजरने वाले वाहनों के आंकड़े जुटाए गए। इनमें निजी वाहनों की आवाजाही की तुलना की गई। आंकड़ों में 6.7 फीसदी की कमी सामने आई है।
इस गिरावट को महत्वपूर्ण इसलिए माना जा रहा है क्योंकि निजी वाहनों की संख्या सीधे तौर पर हाईवे पर यातायात के दबाव से जुड़ी होती है। यदि लोग निजी वाहनों से कम सफर करते हैं तो सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होने के साथ ईंधन की खपत में भी कमी आ सकती है।
PM की अपील से जोड़कर देखा जा रहा असर
प्रधानमंत्री की ओर से लोगों से अनावश्यक यात्रा कम करने और उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने की अपील की गई थी। इसके बाद निजी वाहनों की आवाजाही में आई कमी को इस अपील के संभावित असर के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, किसी भी अध्ययन के आधार पर सीधे यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल है कि वाहनों की संख्या में पूरी कमी केवल प्रधानमंत्री की अपील के कारण हुई। मौसम, त्योहार, छुट्टियां, स्थानीय गतिविधियां, ईंधन की कीमत और अन्य कारण भी हाईवे ट्रैफिक को प्रभावित कर सकते हैं।
हाईवे ट्रैफिक में बदलाव पर नजर
राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की आवाजाही के आंकड़े परिवहन व्यवस्था और लोगों की यात्रा संबंधी आदतों को समझने में मदद करते हैं। निजी वाहनों की संख्या में कमी आने से कुछ क्षेत्रों में ट्रैफिक दबाव घट सकता है।
13 जिलों के 29 टोल प्लाजा से मिले आंकड़ों में 6.7 फीसदी की गिरावट सामने आने के बाद अब आगे के आंकड़ों पर भी नजर रहेगी। यदि आने वाले समय में निजी वाहनों की आवाजाही में कमी का यह रुझान जारी रहता है तो इसे लोगों की यात्रा आदतों में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।