शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को राहत दिलाने की मांग
शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से बचाने की मांग को लेकर TWTA की ओर से आवेदन लगाया गया है। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर शिक्षकों और शिक्षा विभाग की नजर बनी हुई है।
याचिका के जरिए उन शिक्षकों को राहत देने की मांग की गई है, जिनकी नियुक्तियां शिक्षक पात्रता परीक्षा की व्यवस्था लागू होने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई थीं। संगठन का तर्क है कि ऐसे शिक्षकों पर बाद में पात्रता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता लागू करना उचित नहीं होगा।
शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए महत्वपूर्ण पात्रता के रूप में लागू किया गया है। हालांकि अलग-अलग समय पर नियुक्त शिक्षकों को लेकर पात्रता और सेवा शर्तों का मामला कई बार न्यायालयों तक पहुंच चुका है।
TWTA की ओर से दायर आवेदन में 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों की स्थिति को अलग तरीके से देखने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि इन शिक्षकों ने जिस समय नियुक्ति प्राप्त की थी, उस समय मौजूदा नियमों के अनुसार अपनी योग्यता पूरी की थी। ऐसे में वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्हें दोबारा पात्रता परीक्षा की शर्त में बांधना शिक्षकों के हित में नहीं है।
मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष संबंधित पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे। अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड, नियुक्ति की तारीख, उस समय लागू नियमों और पात्रता से जुड़े प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए मामले पर विचार कर सकती है।
इस याचिका का असर बड़ी संख्या में शिक्षकों पर पड़ने की संभावना है। खासतौर पर 2005 से 2009 के बीच नियुक्त होकर लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे शिक्षक इस मामले के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। यदि अदालत से राहत मिलती है तो इस अवधि में नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।
वहीं, पात्रता परीक्षा को लेकर शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और न्यूनतम योग्यता सुनिश्चित करने का उद्देश्य भी महत्वपूर्ण माना जाता है। TET व्यवस्था का उद्देश्य शिक्षकों के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों को सुनिश्चित करना है। ऐसे में अदालत के सामने सेवा में पहले से मौजूद शिक्षकों और पात्रता मानकों के बीच संतुलन का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहेगा।
फिलहाल TWTA के आवेदन के बाद मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अब अगली सुनवाई में अदालत का रुख स्पष्ट होगा। शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से राहत मिलती है या नहीं।